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पाकिस्तान के लिए दोधारी तलवार बना अमेरिका-ईरान तनाव, ख्वाजा आसिफ बोले- रस्सी पर चलने जैसी है स्थिति

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पाकिस्तान की कूटनीति को नाजुक मोड़ पर ला खड़ा कर दिया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि ईरान से ऐतिहासिक नजदीकी और खाड़ी देशों से भाईचारे के रिश्तों के बीच इस्लामाबाद की स्थिति रस्सी पर चलने जैसी है। मध्यस्थता के प्रयास अब तक सफल नहीं हुए हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते तनाव ने पाकिस्तान की कूटनीति को बाहुत ही मुश्किल स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने जियो न्यूज से बातचीत में साफ स्वीकार किया कि इस्लामाबाद इस समय एक नाजुक राजनयिक चुनौती का सामना कर रहा है। आसिफ ने कहा कि ईरान के साथ ऐतिहासिक और भौगोलिक निकटता तथा संघर्ष में शामिल खाड़ी देशों से भाईचारे के रिश्तों के बीच पाकिस्तान की स्थिति ‘रस्सी पर चलने’ जैसी हो गई है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान पश्चिम एशिया में युद्ध रोकने के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश करता रहा है। दोनों पक्षों से संपर्क साधने, फोन करने और बातचीत का माहौल बनाने के प्रयास किए गए, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। आसिफ के अनुसार, तनाव जारी रहने की स्थिति में अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि इस्लामाबाद आगे कितनी सक्रिय भूमिका निभा सकता है और कहां संयम बरतना उसके राष्ट्रीय हित में होगा।

पाकिस्तान के लिए बड़ी परीक्षा

रक्षा मंत्री ने कहा कि देश के सभी पक्षों के साथ भाईचारे के संबंध हैं, इसलिए मध्यस्थता की भूमिका का आकलन बेहद सावधानी से करना होगा। इस्लामाबाद को यह भी सोचना होगा कि कहीं ऐसे कदम न उठाए जाएं, जो उसकी राजनयिक स्थिति और जटिल बना दें। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ी परीक्षा है कि हम इस संघर्ष में कितनी दूर तक जा सकते हैं, हम कहां संयम बरत सकते हैं और क्या हम इससे दूर रहने का जोखिम भी उठा सकते हैं।

आसिफ के अनुसार, इस्लामाबाद अभी भी अमेरिका और ईरान, दोनों से संवाद की खिड़की खुली रखने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान उन्होंने जोर दिया कि इसमें शामिल सभी देशों के साथ संबंध पाकिस्तान के लिए मायने रखते हैं।

ईरान जितना अहम, खाड़ी भी उतनी ही

बातचीत के दौरान पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने खाड़ी देशों के महत्व को भी बताया है। उनका कहना था कि संघर्ष में शामिल खाड़ी देशों के साथ पाकिस्तान के रिश्ते ईरान के रिश्तों से कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। उनके अनुसार, इस संघर्ष में शामिल सभी खाड़ी देशों के साथ-साथ दूसरी तरफ ईरान के साथ भी हमारे भाईचारे के संबंध हैं। ये संबंध हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

कूटनीतिक गुंजाइश बचाने की कोशिश

बातचीत के दौरान आसिफ ने संकेत दिया कि इस्लामाबाद फिलहाल अधिक से अधिक राजनयिक स्थान सुरक्षित रखने की रणनीति अपनाएगा। जहां तक संभव होगा, ऐसे कदमों से बचा जाएगा जो उसके पैंतरेबाजी के दायरे को और कम कर दें। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए यह एक विशेष परिस्थिति बन जाती है। हमें देखना होगा कि हम कितनी दूर तक जा सकते हैं और क्या हम संभव हो तो कुछ कदम उठाने से बच सकते हैं। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि संकट से निकलने का कोई कूटनीतिक रास्ता निकलेगा।

वहीं, आगे की कार्रवाई या अपने साझेदारों से जुड़े घटनाक्रम पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर आसिफ ने कहा कि इस्लामाबाद को हर कार्रवाई का एक जैसा जवाब देने की जरूरत नहीं है। मतलब साफ है, प्रतिक्रिया प्रसंग, हित और मौजूद कूटनीतिक विकल्पों के हिसाब से तय होगी।

अमेरिका-ईरान तनाव में फंसा पाकिस्तान?

बता दें कि पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका-ईरान संवाद के संभावित पुल के रूप में पेश किया था। रक्षा मंत्री इससे पहले भी कह चुके हैं कि क्षेत्र में स्थायी शांति सबके हित में है और दोनों पक्ष किसी व्यवस्था के करीब भी दिखे थे। हालांकि तनाव फिर बढ़ने के बाद इस्लामाबाद की भूमिका एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। एक तरह से कहा जाए तो उसे समझ में नहीं आ रहा है कि कितना आगे बढ़ा जाए, कितना पीछे रहा जाए, और क्या पूरी तरह किनारे रह पाना भी संभव है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN