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पिछली बार का मचाडो से छीना, इस बार सच में नोबेल जीतेंगे ट्रंप? एक्सपर्ट क्या बोले

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Source :- LIVE HINDUSTAN

 नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा शनिवार को होने वाली हैं। ऐसे में सभी का ध्यान इस बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर है। ट्रंप ने पिछली बार की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मचाडो से नोबेल का मेडल ले लिया था।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार प्रेम सार्वजनिक है। पिछली बार का शांति पुरस्कार उनके हाथ नहीं लगा था। नोबेल समिति ने तर्क दिया था कि डोनाल्ड ट्रंप का नाम उम्मीदवारों की लिस्ट में नहीं था। इसलिए उनको यह पुरस्कार नहीं दिया जा सकता है। लेकिन इस बार डोनाल्ड ट्रंप का नाम उम्मीदवारों की लिस्ट में है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या अमेरिका के राष्ट्रपति को हकीकत में नोबेल शांति पुरस्कार मिलेगा? शुक्रवार को इसकी घोषणा होनी है। नोबेल पुरस्कार समिति पर बड़ा दबाव भी है।

विशेषज्ञों की मानें, तो इस बार तमाम फैसलों की वजह से ट्रंप को नोबेल पुरस्कार मिलने की संभावना कम है। लेकिन उनके इस पुरस्कार के लिए चलाए गए कैंपेन का असर विजेता की घोषणा पर पड़ सकता है। पिछली बार जब डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया गया था, तो उन्होंने इस पर काफी टिप्पणी की थी। इतना ही नहीं उन्होंने नोबेल विजेता वेनेजुएला की मचाडो को वाइट हाउस में बुलाकर उनसे यह पुरस्कार ले भी लिया था।

डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल मिलने की संभावना कम

शुक्रवार को नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से पहले नॉर्वे की समिति दबाव में है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ जंग, ग्रीनलैंड समेत कई क्षेत्रों में जमीन पर कब्जे की महत्वाकांक्षा और अंतर्राष्ट्रीय मामलों में लगातार धमकी भरे रवैये की वजह से उनके पुरस्कार जीतने की संभावना कमजोर हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही ट्रंप ने मचाडो से नोबेल पुरस्कार मेडल लेने के बाद इसके बारे में ज्यादा चर्चा नहीं की है। लेकिन अगर उन्हें यह पुरस्कार नहीं दिया जाता है, तो वह उस पर फिर से बात कर सकते हैं। ट्रंप को यह पुरस्कार न मिलना भी अमेरिका के राष्ट्रपति की अप्रत्यक्ष आलोचना के तौर पर देखा जा सकता है।

ओस्लो में पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख हाकोन जेरलो ने भी नोबेल शांति पुरस्कार के फैसले पर डोनाल्ड ट्रंप के असर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप कमरे में मौजूद उस साये की तरह हैं। जिन्हें नरअंदाज नहीं किया जा सकता है। जेरलो ने कहा कि नोबेल समिति को इस बात पर विचार करना होगा कि किसी को नोबेल शांति पुरस्कार देने की वजह से उसके फायदे के बजाय नुकसान हो सकता है।

पहले भी होती रही हैं, लॉबिंग की कोशिश- नॉर्वे नोबेल समिति के सचिव

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नोबेल प्रेम को देखते हुए कई देशों के नेताओं ने उनके नाम का समर्थन नोबेल के लिए किया था। कई देशों से आए इस समर्थन के बाद नोबेल समिति पर भी इसका दबाव बड़ा था। हालांकि, नॉर्वेजियन समिति के सदस्य क्रिस्टियन बर्ग हारपविकेन ने साफ किया कि ऐसी लॉबिंग कोई असामान्य बात नहीं है। उन्होंने कहा, “हमेशा बहुत लॉबिंग होती है, और आखिरकार समिति पर दबाव बनाने की कोशिशें भी होती हैं।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसी कोशिशों का समिति की चर्चाओं या फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ता।

कौन हैं नोबेल शांति पुरस्कार के संभावित दावेदार

डोनाल्ड ट्रंप के साथ इस बार कई बड़े नाम नोबेल शांति पुरस्कार की लिस्ट में शामिल है। इस बार नोबेल शांति पुरस्कार के संभावित दावेदारों में ‘सेव द चिल्ड्रेन’ और यूक्रेन के बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता मायकोला कुलेबा शामिल हैं, जिन्होंने कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों से कथित तौर पर रूस ले जाए गए बच्चों की वापसी के लिए अभियान चलाया है। इसके अलावा सूडान के ‘इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स’ (ERR) पर भी पुरस्कार के लिए विचार किया जा सकता है। यह युद्ध और भुखमरी से प्रभावित लोगों की मदद करने वाले स्वयंसेवकों का एक नेटवर्क है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN