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ईरान की जेल में बंद 25 साल के प्रदर्शनकारी अलीरेजा सेपाही ने अपनी मंगेतर से फोन पर शादी की। अगले ही दिन यानी 5 अक्टूबर को इस्फहान की सेंट्रल जेल में उसे फांसी दे दी गई।
ईरान में एक शख्स को शादी के अगले दिन ही फांसी दे दी गई। 25 साल के अलीरेजा सेपाही को जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार किया गया था। 5 अक्टूबर की सुबह इस्फहान की सेंट्रल जेल में उसे फांसी दी गई। बताया जा रहा है कि उसके साथ 21 साल के अलीरेजा रायसी को भी फांसी दी गई। बताया जा रहा है कि मौत से एक दिन पहले उन्होंने जेल से ही अपनी मंगेतर से शादी कर ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेपाही ने 22 साल की महशाद काशानी से शादी की। काशानी भी प्रदर्शनों के मामले में जेल में थीं, लेकिन दूसरी जेल में बंद थीं। शादी उनके वकील ने फांसी से एक दिन पहले टेलीफोन पर करवाई। इसके लिए दोनों के मात-पिता ने इजाजत दे दी थी।
जनवरी में क्या हुआ था?
अधिकारियों के अनुसार, 8 जनवरी को इस्फहान के अलीखानी स्क्वायर में हुए विरोध प्रदर्शनों से यह मामला जुड़ा था। उस घटना में चार पुलिस अधिकारी मारे गए थे। न्यायपालिका की मीजान एजेंसी के मुताबिक, सेपाही को एक हथियारबंद समूह की सदस्यता और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का दोषी ठहराया गया। नॉर्वे के संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स के अनुसार, 8 और 9 जनवरी को अपने चरम पर पहुंचे इन प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में ईरान अब तक 34 लोगों को मौत की सजा दे चुका है। अधिकार समूहों का कहना है कि प्रदर्शनों को सख्ती से कुचल दिया गया। इनमें हजारों लोग मारे गए और इंटरनेट भी बंद कर दिया गया था।
10 जनवरी को गिरफ्तार हुआ था सेपाही
सेपाही को कथित घटना के कुछ ही दिन बाद 10 जनवरी को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के समय उसकी मां भी साथ थीं। मां अभी भी जेल में हैं और पांच साल की सजा काट रही हैं। अमेरिका के अब्दुर्रहमान बोरूमंद सेंटर के मुताबिक, सेपाही के खिलाफ केस में गंभीर खामियां थीं। बचाव के सबूतों को नजरअंदाज किया गया। फुटेज से पता चलता है कि वे उस समय घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे। इस मामले में सेपाही समेत करीब एक दर्जन लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी।
दौरा पड़ने से टला गया सजा
ईरान ह्यूमन राइट्स ने बताया कि 19 जुलाई को दो लोगों को जेल में फांसी दी गई। सिपाही को 28 जुलाई को अलीखानी स्क्वायर में उसके चचेरे भाई अबोलफजल समेत दो लोगों के साथ सार्वजनिक रूप से फांसी दी जानी थी। संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्टकार माई सातो ने कहा कि तय फांसी से कुछ समय पहले सेपाही को दिल का दौरा पड़ा और उसे अस्पताल ले जाया गया। बाकी दो लोगों को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई। कुछ दिन बाद सेपाही को अस्पताल से छुट्टी मिली और वह वापस जेल चला गया। वहां वह हर दिन फांसी के डर में रहा।
कोर्ट ने खारीज कर दी थी अपील
इस्फहान की रिवोल्यूशनरी कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। रिश्तेदारों को आखिरी मुलाकात के लिए बुलाया गया। लेकिन सेपाही का एक आखिरी इरादा था। उसके वकील ने काशानी के साथ ऑडियो कॉल का इंतजाम किया, ताकि मरने से पहले धार्मिक शादी की कसमें पढ़ी जा सकें। अधिकार समूहों द्वारा साझा की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार, वकील ने पूछा कि क्या वे शादी की इजाजत देंगे और दहेज में पवित्र कुरान की एक कॉपी, रॉक कैंडी का एक टुकड़ा और एक लाल गुलाब देंगे। दोनों पक्षों के माता-पिता ने हां कह दिया। जेल अधिकारियों ने जोड़े को आखिरी बार आमने-सामने मिलने की अनुमति नहीं दी।
दफनाने को नहीं मिला शव
अब्दुर्रहमान बोरूमंद सेंटर की सह-संस्थापक रोया बोरूमंद ने कहा कि वकीलों को उम्मीद थी कि शादी से फांसी में देरी हो सकती है। लेकिन अधिकारियों ने दावा किया कि मंगेतर का कैदी से कोई रिश्ता नहीं है और व्यक्तिगत समारोह रोक दिया। उन्होंने कहा कि शादी हो गई, लेकिन गैर-मौजूदगी में। यह कानूनी काम था, पर जेल के अंदर दोनों की मौजूदगी में नहीं हुआ। माई सातो ने कहा कि फांसी के बाद भी परिवार के लिए डर बना रहा। शव को इस्फहान में दफनाने के लिए वापस नहीं दिया गया, बल्कि करीब 200 किलोमीटर दूर काशान भेज दिया गया।
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