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बच्चों का कॉन्फिडेंस बढ़ाती हैं ये 7 छोटी आदतें, आज से इन्हें दें बढ़ावा!

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Source :- LIVE HINDUSTAN

बच्चों की छोटी-छोटी आदतों को कई बार पेरेंट्स गलत समझकर उन्हें रोकने लगते हैं। लेकिन अगर आपका बच्चा इन 7 आदतों को अपनाता है तो इन्हें गलत ना समझें क्योंकि ये आदतें कॉन्फिडेंस बढ़ाती हैं। 

हर पेरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा कॉन्फिडेंट और बेझिझक हर सही चीज कर सके। लेकिन कई बार पेरेंट्स की कुछ गलतियां ही बच्चे को बुद्धू या डरपोक बना सकती है। जबकि बच्चे को आत्मविश्वासी और बोल्ड बनाने के लिए माता-पिता को पॉजिटिव और धैर्यपूर्ण तरीका अपनाना चाहिए। 2 साल की उम्र से पहले आप धीरे-धीरे यहां बताई 7 छोटी-छोटी आदतों को बढ़ावा दे सकते हैं जो आत्मविश्वास, बातचीत करने की क्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद करती हैं।

1) उन्हें पहले कोशिश करने दें

अकसर बच्चे कुछ नया करते हैं तो पेरेंट्स फटाफट से उनकी मदद के लिए हाजिर हो जाते हैं। लेकिन हमेशा ऐसा करना सही नहीं है। चाहे खिलौने को टोकरी में रखना हो या चम्मच से खाना हो हमेशा बच्चे की मदद करने से पहले उन्हें थोड़ा समय दें।

2) वे जो कहना चाह रहे हैं, उस पर ध्यान दें

बच्चे जब तक बोलना नहीं सीखते हैं तब तक अपनी बात इशारों से कहने की कोशिश करते हैं।अक्सर इशारा करना, हाथ बढ़ाना, कोई आवाज या शब्द निकालना ये सब बातचीत का ही हिस्सा हैं। जब भी वह किसी चीज पर इशारा करें तो उन्हें बताएं कि वह क्या मांग रहे हैं। जैसे अगर बॉल की तरफ इशारा करें तो उनसे कहें कि ‘तुम्हें बॉल चाहिए!’- उन्हें यह दिखाएं कि उनकी बात मायने रखती है।

3) उन्हें दोबारा कोशिश करने के लिए प्रोत्साहित करें

बच्चे को हमेशा खुद से कोशिश करने दें। जैसे ब्लॉक बनाते समय अगर वह गिर गए तो कहें, ‘अरे चलो फिर से कोशिश करते हैं।’ बिना काम अपने हाथ में लिए उन्हें सपोर्ट करें। ये उनके डेवलपमेंट में मदद करता है।

4) उन्हें छोटे-छोटे ऑप्शन दें

बच्चे को हमेशा चीजों के ऑप्शन देने की कोशिश करें। जैसे दो शर्ट, दो किताबें या दो स्नैक्स दिखाएं। छोटी सी नजर या इशारा भी यह बताने का उनका तरीका हो सकता है कि ‘मैं इसे चुनता हूं!’

5. उन्हें चीजें एक्सप्लोर करने दें और आपके पास वापस आने दें

उन्हें अपनी छोटी सी दुनिया को जानने-समझने दें। बच्चे अक्सर एक्सप्लोर करके काफी कुछ सीखते हैं। इसलिए उन्हें चीजें एक्सप्लोर करने दें और आपके पास वापस आने दें। इससे उन्हें ये पता होगा कि जब भी उन्हें हिम्मत, प्यार या मदद की जरूरत होगी, आप उनके पास ही हैं।

6. ‘नहीं!’ कहने से डरें नहीं

वह छोटा सा ‘नहीं!’ भी उनकी पसंद बताने की कोशिश है। आप उनकी भावनाओं को समझते हुए भी अपनी बात पर कायम रह सकते हैं। ‘तुम जाना नहीं चाहते। मैं समझती हूं। लेकिन अब जाने का समय हो गया है, और मैं तुम्हारी मदद करूंगी।ट

7. उन्हें सिखाएं कि मदद मांगना ठीक है

कॉन्फिडेंस का मतलब सब कुछ अकेले करना नहीं है। इसका मतलब यह जानना भी है कि ‘जरूरत पड़ने पर मैं मम्मा से मदद मांग सकती हूं।

नोट- याद रखें कि ये मौके हैं, कोई चेकलिस्ट नहीं है। हर बच्चा अलग तरह से बढ़ता है। शांत और सावधान बच्चे भी कॉन्फिडेंट हो सकते हैं।

डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN