Home rss world hindi भारत की टेंशन बढ़ा रहा बांग्लादेश, पड़ोसी देश में चीन और तुर्किए...

भारत की टेंशन बढ़ा रहा बांग्लादेश, पड़ोसी देश में चीन और तुर्किए कर रहे खेला

3
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

बांग्लादेश तुर्किए के साथ मिलकर सिलिगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक ड्रोन फैक्ट्री बनाने की योजना बना रहा है। बोगुरा भारत की सीमा के नजदीक है। इसमें बांग्लादेश अपने टेक्सटाइल इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर सकता है।

भारत और बांग्लादेश के बीच लगातार संबंधों को पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इसके बाद भी दोनों देशों के बीच में कुछ मुद्दे परेशानी का विषय बने हुए हैं। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पहली भारत यात्रा अभी भी ठंडे बस्ते में हैं। दूसरी तरफ भारत कई बार उन्हें नई दिल्ली आने का न्योता दे चुका है। लेकिन ढाका सरकार पूर्व पीएम शेख हसीना के मुद्दे पर अभी तक अपना रुख नई दिल्ली से अलग बनाए हुए है। इन सब बातों के बीच ढाका अब ऐसे कदम उठा रहा है, जो दिल्ली को पूर्वोत्तर के बारे में और गहनता से सोचने के लिए मजबूर कर सकते हैं। क्योंकि चीन और तुर्किए मिलकर इस क्षेत्र में खेला करने की योजना बना रहे हैं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ भारत जहां बांग्लादेश के साथ अपने कूटनीतिक रिश्ते मजबूत करने की तरफ देख रहा है। वहीं दूसरी ओर ढाका ड्रोन वॉरफेयर में अपने हाथों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इसमें उसका साथ देने के लिए आगे आ रहा है तुर्किए। वही देश जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को अपने ड्रोन और ऑपरेटर सप्लाई किए थे। वही तुर्किए अब बांग्लादेश के साथ मिलकर भारत की सीमा के नजदीक ड्रोन फैक्ट्री बनाने पर कदम बढ़ा रहा है।

बांग्लादेश के शहर बोगुरा में तुर्किए के सहयोग से तारिक रहमान सरकार यह फैक्ट्री बनाने की योजना बना रही है। भारत की दृष्टि से यह इसलिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह बोगुरा भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर से केवल 75 से 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

टेक्सटाइल के अनुभव को ड्रोन बनाने में इस्तेमाल करेगा बांग्लादेश

बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के जाने के बाद भारत विरोधी तत्वों की वृद्धि हुई है। ऐसे में तुर्किए और पाकिस्तान ने यहां पर अपने पैर जमाने की कोशिश करना शुरू कर दिया है। इसी पहल पर आगे बढ़ते हुए ढाका ने अंकारा के साथ मिलकर बोगुरा में ज्वाइंट वेंचर ड्रोन फैक्ट्री विकसित करने की योजना बनाई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी देश के लिए ड्रोन फैक्ट्री बनाना इतना आसान नहीं होता है। लेकिन बांग्लादेश पिछले काफी समय से टेक्सटाइल के क्षेत्र में अपनी धाक जमाए हुए है। ऐसे में अब वह अपने टेक्सटाइल इन्फ्रास्ट्रक्चर का उपयोग ड्रोन फैक्ट्री निर्माण के लिए करने में कर सकता है।

तुर्किए के साथ ड्रोन के मामले में पुराने हैं बांग्लादेश के संबंध

रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश 2022 में तुर्किए से ड्रोन्स की डील कर चुका है। इसके तहत वह बायराक्तारTB2 ड्रोन का इस्तेमाल वर्तमान में कर भी रहा है। इनके अलावा बांग्लादेशी सेना के पास वर्तमान में TRG-300 ड्रोन भी हैं। खबरों के मुताबिक उसी समय पर बांग्लादेश सरकार ने TB2 एयरफ्रेम पार्ट्स, सेंसर हाउसिंग और ग्राउंड-कंट्रोल मॉड्यूल को स्थानीय स्तर पर बनाने के लिए बातचीत कर रहा था, जिसमें तुर्की के इंजीनियर बांग्लादेशी कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे रहे थे। इसके अलावा ढाका सरकार ड्रोन वारफेयर में अपने आप को आगे बढ़ाने और तुर्किए की टेक्नोलॉजी और अपनी मैनपावर का इस्तेमाल कर बनने वाले ड्रोन्स को इंडोनेशिया, मलेशिया को निर्यात करने की तरफ भी देख रहा था।

टेक्सटाइल इन्फ्रास्ट्रक्चर कैसे होगा ड्रोन बनाने में फायदेमंद?

विशेषज्ञों की मानें तो आजकल जिन ड्रोन्स को बनाया जा रहा है। उनका ज्यादातर ढांचा कम्पोजिट मटेरियल से बना होता है। ड्रोन को मजबूती देने वाले फाइबर को कपड़े की तरह ही बुना जाता है। उसकी परतों को सटीक पैटर्न में काटना और फिर उन्हें बहुत सावधानी से नियंत्रित ले-अप प्रोसेस के ज़रिए एक साथ जोड़ा जाता है। छोटे और आसानी से खराब हो सकने वाले ड्रोन के लिए, ग्लास फाइबर, फोम कोर और ‘आउट-ऑफ-ऑटोक्लेव क्योरिंग’ के बढ़ते इस्तेमाल ने इस क्षेत्र में आने की रुकावटों को और कम कर दिया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में भले ही कोई कंपोजिट इंडस्ट्री नहीं है। लेकिन यहाँ दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अनुशासित टेक्सटाइल वर्कफोर्स में से एक है, जिसमें लगभग 40 लाख गारमेंट वर्कर हैं। मिलिट्री जानकारों का कहना है कि सटीक कटिंग, पैटर्न डिसिप्लिन और बार-बार हाथ से काम करने जैसे हुनर ​​को कंपोजिट प्लाई कटिंग, किटिंग, ले-अप और स्टिच्ड-प्रीफॉर्म मैन्युफैक्चरिंग में बदला जा सकता है।

भारत ने भी इसी तरह की तकनीक से अपने ड्रोन मैनेजमेंट को आगे बढ़ाने का काम किया है। उदाहरण के तौर पर 15-20 सालों में, भारतीय ऑटो-कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों ने अपनी स्किल्स का इस्तेमाल करके, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और ग्लोबल प्राइम जैसे बड़े कस्टमर्स को हासिल करके, ऑफसेट और खरीद सुधारों के जरिए पॉलिसी सपोर्ट का फायदा उठाकर और क्षमता विकास में समय लगाकर एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में कदम रखा।

खास बात यह है कि भारत इस समय ड्रोन टेक्नोलॉजी के मामले में बांग्लादेश से कहीं आगे है। लेकिन तुर्किए की टेक्नोलॉजी और टेक्सटाइल के अनुभव से बांग्लादेश कुछ ही सालों में उस मुकाम को हासिल कर सकता है। जिसे हासिल करने में भारत को कई दशक लग गए थे।

बता दें, बांग्लादेश के लिए तुर्किए ही अकेला देश नहीं है, जो उसे टेक्नोलॉजी देने के लिए राजी हो रहा है। दूसरी तरफ चीन भी है, जो बांग्लादेश के साथ बेहतर व्यवस्था बनाने और बेहतर संबंध बनाने की तरफ देख रहा है। इसी के चलते चीन भी बांग्लादेश के साथ मिलकर नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN