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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/05/27/1200x900/mohur_1779861715844_1779861736702_64b902b9-ad2b-4542-af16-b3a1d68c68b2.jpgमोहम्मद रफी एक ऐसे सिंगर थे जिन्हें हर एक्टर अपने गाने में लेना चाहता था। वहीं राजेंद्र कुमार के भी कई गानों में रफी साहब ने अपनी आवाज दी थी जो सुपरहिट रहे थे।
राजेंद्र कुमार जिन्हें जुबली कुमार कहा जाता है उनकी फिल्मों के कई गानें हिट थे। इतना ही नहीं उनके ज्यादातर गाने मोहम्मद रफी गाते थे। राजेंद्र का अंदाज और रफी की आवाज दोनों जब मिलती थी तो एक अलग सुपरहिट गाना बनकर आता था जो हमेशा दर्शकों का दिल जीत लेते थे।
जब राजेंद्र ने मोहम्मद रफी को छोड़ मुकेश को चुना
लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक वक्त ऐसा आया जब राजेंद्र ने अपनी फिल्म साथी के लिए मोहम्मद रफी को छोड़कर मुकेश से गाना गंवाने का सोचा। राजेंद्र के इस फैसले ने सबको हैरान कर दिया था। उन दिनों राजेंद्र कुमार की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर 25 हफ्ते यानी सिल्वर जुबली मनाती थी। उनकी फिल्मों के हिट होने के पीछे सबसे बड़ा हाथ था उनके गानों का जो मोहम्मद रफी गाते थे।
रफी और राजेंद्र के गानें
रफी ने उनके लिए बहारों फूल बरसाओ, मेरा महबूब आया है, ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज ना होना, ऐ नेग सा मस्ताना जैसे हिट गाने दिए हैं। लोगों को लगने लगा था कि राजेंद्र कुमार, रफी साहब की आवाज के बिना अधूरे हैं। लेकिन फिर आई फिल्म साथी और इस फिल्म से जुड़ा एक बड़ा सस्पेंस।
क्यों लिया था राजेंद्र ने यह फैसला
साथी फिल्म के म्यूजिक की कमान नौशाद के हाथ में थी। लेकिन राजेंद्र कुमार ने नौशाद के सामने एक शर्त रखी। उन्होंने कहा कि इस फिल्म के गाने मोहम्मद रफी नहीं मुकेश गाएंगे। नौशाद इस बात को सुनकर हैरान हो गए क्योंकि कुछ समय पहले राजेंद्र ने यह जिद्द की थी कि उनके गाने मोहम्मद रफी ही गाएंगे।
कई लोगों ने नौशाद से गुजारिश की थी कि रफी को ही को गाने गाने दें, लेकिन वह जानते थे कि राजेंद्र कुमार की जिद्द के आगे कुछ नहीं हो सकता है। राजेंद्र कुमार का मानना था कि साथी फिल्म में जो उनका किरदार है उसकी गहराई और दर्द को मुकेश ही पर्दे पर अच्छे से दिखा सकते हैं।
राजेंद्र और मोहम्मद रफी के बीच नहीं था मनमुटाव
जब राजेंद्र ने यह फैसला लिया तो एक सवाल खड़ा हुआ कि क्या दोनों के बीच कोई आपसी मनमुटाव था तो ऐसा बिल्कुल नहीं था। इस बात को साफ तरीके से मना कर दिया गया था। कहा गया था कि यह सिर्फ राजेंद्र का बतौर एक्टर लिया गया फैसला था।वह समझ पा रहे थे कि उनके इस किरदार के लिए रफी साहब से बेहतर मुकेश की आवाज ठीक रहेगी।
राजेंद्र का फैसला हुआ था सक्सेसफुल
दिलचस्प बात यह है कि उनका यह फैसला सही साबित हुआ। इस फिल्म के सभी गाने ब्लॉकबस्टर हुए और आज तक याद किए जाते हैं। मुकेश ने इस फिल्म के लिए मेरा प्यार भी तू है, उसने जाना ये जैसे हिट गाने दिए।
रफी साहब थे ऑलराउंडर
मोहम्मद रफी के बारे में बता दें कि उन्हें ऑलराउंडर कहा जाता था। वह पार्टी, सैड सॉन्ग, लव सॉन्ग से लेकर गजल वगैरह सब गाते थे। रफी साहब की फैन फॉलोइंग काफी जबरदस्त थी। यहां तक कि आज तक की जनरेशन भी रफी साहब के गाने सुनती है।
रफी साहब को उनकी जादुई आवाज के लिए कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स, नेशनल फिल्म अवॉर्ड फिल्म हम किसी से कम नहीं के लिए और पद्मश्री अवॉर्ड से भी नवाजा गया है।
जब मोहम्मद रफी को अंतिम विदाई देने आए थे 10 हजार लोग
इतना ही नहीं जब रफी साहब का निधन हुआ तब 10 हजार से ज्यादा लोग उन्हें अंतिम विदाई देने आए थे। उस दिन भारी बारिश हो रही थी, इसके बावजूद इतने लोग देखकर सब हैरान हो गए थे, लेकिन इससे यह भी साफ पता चल गया कि रफी को लेकर लोगों के मन में किस कदर दीवानगी थी।
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