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सरकार कोचीन शिपयार्ड से बेच रही अपनी हिस्सेदारी, शेयर खरीदें या दूर रहें? जानिए

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं और खासकर सरकारी कंपनियों (PSU Stocks) पर नजर रखते हैं, तो आपके लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard) में अपनी 5.04% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। यह हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेची जाएगी। इस कदम का उद्देश्य सरकार के विनिवेश (Disinvestment) कार्यक्रम को आगे बढ़ाना है। इस खबर के बाद अब निवेशकों की नजर इस OFS पर टिकी हुई है, क्योंकि हाल के महीनों में रक्षा और शिपबिल्डिंग सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है।

सरकार ने इस OFS के लिए 1,400 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। इसका मतलब है कि निवेशक इससे कम कीमत पर बोली नहीं लगा सकेंगे। 7 जुलाई को संस्थागत (Non-Retail) निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 8 जुलाई को रिटेल निवेशक आवेदन कर सकेंगे। अंतिम आवंटन निवेशकों द्वारा लगाई गई बोलियों और डिमांड के आधार पर तय होगा।

आखिर OFS (Offer for Sale) क्या होता है?

आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके जरिए किसी लिस्टेड कंपनी के प्रमोटर या सरकार अपने शेयर स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से बेचते हैं। इस प्रक्रिया में कंपनी नए शेयर जारी नहीं करती, बल्कि पहले से मौजूद हिस्सेदारी बेची जाती है। इसलिए OFS से कंपनी के पास नया पैसा नहीं आता, बल्कि शेयर बेचने वाले प्रमोटर या सरकार को रकम मिलती है।

कोचीन शिपयार्ड भारत की प्रमुख सरकारी शिपबिल्डिंग और शिप रिपेयर कंपनियों में से एक है। पिछले एक साल में रक्षा क्षेत्र और ‘मेक इन इंडिया’ से जुड़े ऑर्डर्स बढ़ने के कारण इस सेक्टर के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। नौसेना के आधुनिकीकरण, रक्षा उत्पादन और जहाज निर्माण से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स ने इस कंपनी को भी निवेशकों के रडार पर ला दिया है।

मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि इस OFS की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि 1,400 रुपये का फ्लोर प्राइस मौजूदा मार्केट भाव से कितना आकर्षक है। अगर निवेशकों को उचित डिस्काउंट मिलता है, तो इस इश्यू में अच्छी मांग देखने को मिल सकती है। कई बार सरकार खुदरा निवेशकों को अतिरिक्त छूट भी देती है। हालांकि, इस बार अभी तक केवल फ्लोर प्राइस और ऑफर की संरचना की जानकारी दी गई है।

इस OFS में सरकार ने ग्रीन-शू ऑप्शन भी रखा है। इसका मतलब यह है कि अगर निवेशकों की ओर से जबरदस्त मांग आती है, तो सरकार तय हिस्सेदारी से अधिक शेयर भी बेच सकती है। अगर पूरा OFS और ग्रीन-शू ऑप्शन सफल रहता है, तो सरकार की कोचीन शिपयार्ड में हिस्सेदारी 5.04% तक कम हो जाएगी।

यह कदम सरकार के FY27 विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही इससे कंपनी में पब्लिक शेयरहोल्डिंग (Public Float) बढ़ेगी, जिससे शेयर में लिक्विडिटी भी बेहतर हो सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निवेशकों को इस OFS में हिस्सा लेना चाहिए? इसका जवाब बाजार की स्थिति, शेयर के मौजूदा मूल्यांकन और रक्षा क्षेत्र के प्रति निवेशकों की रुचि पर निर्भर करेगा। चूंकि पिछले कुछ समय में रक्षा और शिपबिल्डिंग कंपनियों के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया है, इसलिए कोचीन शिपयार्ड का यह OFS भी बाजार में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। निवेशकों को आवेदन करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल, मौजूदा वैल्यूएशन और अपने निवेश लक्ष्य का जरूर आकलन करना चाहिए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN