Source :- LIVE HINDUSTAN
अगर आप स्मार्टफोन खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। खबर है कि बजट स्मार्टफोन की कीमतों में जल्द 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसका बाद आपको पुरानी चिप वाले फोन के लिए भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।
स्मार्टफोन में कीमतों में कंपनियां लगातार बढ़ोतरी कर रही हैं और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खबर है कि जल्द बढ़ोतरी की एक और लहर आने वाली है। ईटी ने अपनी रिपोर्ट में ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के हवाले से बताया कि, आने वाले महीनों में नया स्मार्टफोन खरीदना काफी महंगा हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो बजट एंड्रॉयड फोन की तलाश में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते चलन की वजह से मेमोरी कंपोनेंट्स की कीमतों में भारी उछाल आया है। इससे सस्ते (लो-एंड) स्मार्टफोन की कीमतें लगभग 30% तक बढ़ सकती हैं। कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही है। चूंकि AI कंपनियां ग्लोबल मेमोरी सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर रही हैं, इसलिए निर्माताओं के लिए लागत (इनपुट कॉस्ट) बढ़ गई है। अंततः, इस बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिससे सस्ते स्मार्टफोन खरीदना मुश्किल हो जाएगा। ग्राहकों के लिए इसका मतलब यह हो सकता है कि उन्हें अपने मौजूदा फोन जैसे स्पेसिफिकेशन वाले फोन के लिए भी काफी ज्यादा पैसे चुकाने पड़ें, या फिर उन्हें अपना फोन अपग्रेड करने का विचार फिलहाल टालना पड़े। क्या है पूरा मामला, चलिए बताते हैं…
स्मार्टफोन की कीमतें 30 फीसदी क्यों बढ़ सकती हैं?
दरअसल, AI कंपनियों में मेमोरी चिप्स की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है, जो कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण बनती जा रही है। डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ी मात्रा में मेमोरी की जरूरत होती है, जिससे स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग समेत अन्य उद्योगों की सप्लाई पर दबाव पड़ रहा है।
जेफरीज के अनुसार, एआई इंडस्ट्री की ओर से मेमोरी की मांग कैलेंडर ईयर 2027 (CY27) में कुल मांग का करीब 60 प्रतिशत हो सकती है। रिपोर्ट में एआई कंपनियों द्वारा किए जा रहे भारी निवेश योजनाओं का भी जिक्र है। उनका संभावित खर्च CY27 में लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इस खर्च के कारण मेमोरी की कीमतें कई और तिमाहियों तक ऊंची बनी रह सकती हैं।
स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों पर इसका असर पहले से ही दिखने लगा है। जेफरीज का अनुमान है कि प्रति स्मार्टफोन मेमोरी की लागत लगभग तीन गुना बढ़ गई है, जो CY25 में करीब 20 डॉलर थी और अभी 60-65 डॉलर हो गई है। सस्ते स्मार्टफोन में मेमोरी खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कंपनियों के पास अतिरिक्त खर्च को अपने मार्जिन या रिटेल कीमतों पर असर डाले बिना एडजस्ट करने की बहुत कम गुंजाइश होती है।
बजट एंड्रॉयड फोन को कीमत में सबसे बड़ा झटका लग सकता है
सस्ते स्मार्टफोन सेगमेंट पर बढ़ती मेमोरी लागत का सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है। जेफरीज ने बताया कि 200 डॉलर से कम कीमत वाले एंड्रॉयड स्मार्टफोन में मेमोरी कुल बिल ऑफ मटेरियल्स (BOM) का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा बनाती है। BOM का मतलब है फोन तैयार करने के लिए सभी जरूरी पार्ट्स का कुल खर्च। जब कोई जरूरी पार्ट बहुत महंगा हो जाता है, तो कंपनियों के पास अपने मुनाफे को बचाने के विकल्प बहुत सीमित रह जाते हैं।
ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि लो-एंड स्मार्टफोन की कीमतों में लगभग 30% की बढ़ोतरी से ग्राहकों के खरीदारी के व्यवहार में बदलाव देखने को मिल सकता है। कुछ खरीदार बजट फोन पर ज्यादा पैसे खर्च करने के बजाय अपनी खरीदारी को टाल सकते हैं। वहीं, कुछ लोग सस्ते विकल्प के तौर पर रिफर्बिश्ड या सेकंड हैंड स्मार्टफोन की ओर रुख कर सकते हैं। इसके अलावा, कंपनियां खर्चों को कंट्रोल करने के लिए बाजार में उपलब्ध किफायती मॉडलों की संख्या कम कर सकती हैं और अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को भी सीमित कर सकती हैं।
2026 और 2027 में स्मार्टफोन की शिपमेंट में गिरावट आ सकती है
पार्ट्स की बढ़ती लागत और ग्राहकों की कमजोर मांग का असर अगले दो सालों में ग्लोबल स्मार्टफोन मार्केट पर पड़ सकता है। जेफरीज का अनुमान है कि CY26 में ग्लोबल स्मार्टफोन शिपमेंट सालाना आधार पर 15% गिरकर 1,067 मिलियन यूनिट रह जाएगी। यह गिरावट CY27 में भी जारी रह सकती है, जिसमें शिपमेंट और घटकर 911 मिलियन यूनिट तक आने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, 200 डॉलर से कम कीमत वाले स्मार्टफोन का वैश्विक बाजार हिस्सा CY25 में 42% से घटकर CY26 में 24% हो सकता है। इसकी तुलना में, 600 डॉलर से अधिक कीमत वाले स्मार्टफोन का बाजार हिस्सा इसी अवधि के दौरान 29% से बढ़कर 38% हो सकता है। इससे पता चलता है कि स्मार्टफोन बाजार धीरे-धीरे अधिक महंगे फोन की ओर बढ़ सकता है, क्योंकि बजट मॉडल को मुनाफे के साथ बनाना मुश्किल होता जा रहा है।
चिप की कमी से स्मार्टफोन और भी महंगे हो सकते हैं
मेमोरी ही स्मार्टफोन कंपनियों के लिए एकमात्र समस्या नहीं है। रिपोर्ट में सेमीकंडक्टर की कमी को भी सप्लाई चेन की बड़ी चिंता बताया गया है। कुछ कंपनियां फोन बनाने के खर्च को कंट्रोल करने के लिए नई फ्लैगशिप चिप्स की जगह एक-दो जेनरेशन पुराने प्रोसेसर इस्तेमाल करने पर विचार कर सकती हैं। इससे फोन बनाने का खर्च कंट्रोल कर सकते हैं, लेकिन ग्राहकों को नए हार्डवेयर और परफॉर्मेंस फीचर्स से समझौता करना पड़ सकता है। जेफरीज ने चेतावनी दी है कि भले ही स्मार्टफोन की मांग CY28 से तेजी से ठीक हो जाए, लेकिन अगर कंपनी मौजूदा मंदी के दौरान प्रोडक्शन कैपेसिटी कम करती हैं, तो उन्हें शिपमेंट का स्तर बहाल करना संघर्ष करना पड़ सकता है। अपग्रेड की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए आने वाली तिमाहियां मुश्किल विकल्प सामने ला सकती है आ सकते हैं, नए फोन के लिए ज्यादा पैसे चुकाना, पुराने स्पेसिफिकेशन वाले फोन लेना या मौजूदा स्मार्टफोन को और लंबे समय तक इस्तेमाल करना। अब देखना यह है कि ग्राहक क्या फैसला लेते हैं।
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