Source :- LIVE HINDUSTAN
NSE IPO: करीब 10 साल के इंतजार के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने आईपीओ की मंजूरी के लिए सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर जमा कर दिए हैं। करीब 30,000 करोड़ रुपये के आकार वाला यह इश्यू पूरी तरह मौजूदा शेयरधारकों की बिक्री पेशकश पर आधारित होगा। मतलब ये हुआ कि इसमें कोई फ्रेश शेयर नहीं होगा। इस आईपीओ से जो भी पैसे मिलेंगे, वह कंपनी के लिए इस्तेमाल नहीं होगा। यह रकम सिर्फ शेयरधारकों को मिलने वाली है।
2.48 करोड़ शेयर बेचेगा एसबीआई
ड्राफ्ट पेपर के मुताबिक, एनएसई आईपीओ में मौजूदा शेयरधारक कुल 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे। इस इश्यू के जरिए शेयरधारक सामूहिक रूप से एनएसई में अपनी करीब छह प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेंगे। प्रमुख हिस्सेदारी विक्रेताओं में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) शामिल है, जो 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा। वहीं, एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगा। बता दें कि एसबीआई की एनएसई में 3.23 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि उसकी सब्सिडयरी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
एलआईसी नहीं बेचेगी हिस्सेदारी
अन्य प्रमुख विक्रेताओं में कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (1.19 करोड़ शेयर), अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) प्रा. लि. (1.12 करोड़ शेयर), बैंक ऑफ बड़ौदा (1.10 करोड़ शेयर) और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (1.09 करोड़ शेयर) शामिल हैं। अहम बात है कि एनएसई में सबसे अधिक 10.72 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) इस आईपीओ में कोई शेयर नहीं बेचेगी।
10 साल से था इंतजार
एनएसई ने पहली बार 2016 में लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए आईपीओ दस्तावेज दाखिल किए थे लेकिन सेबी ने कामकाज के संचालन और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण मंजूरी रोक दी थी। को-लोकेशन मामले में एनएसई ने जून, 2025 में सेबी के समक्ष सैटलमेंट आवेदन दायर किया था। इस मामले में कुछ ब्रोकरों पर एक्सचेंज की ट्रेडिंग सिस्टम तक विशेष एक्सेस का आरोप था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद एनएसई ने 2025 में मामले के निपटारे के लिए 1,388 करोड़ रुपये का भुगतान करने की पेशकश की थी, जिससे उसकी सूचीबद्धता की राह आसान हुई।
फरवरी में मंजूरी
एनएसई के निदेशक मंडल ने छह फरवरी को प्रस्तावित आईपीओ को मंजूरी दी थी। यह मंजूरी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिलने के बाद दी गई थी। आईपीओ की तैयारी के तहत एनएसई ने 20 मर्चेंट बैंकर के अलावा कानूनी सलाहकारों और अन्य मध्यस्थों की नियुक्ति की है।
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