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50 लाख के होम लोन पर बैंक लेता है ₹ 1.25 करोड़! Home Loan का ये गणित जानकर चौंक जाएंगे

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Home Loan: अपना घर खरीदना लगभग हर भारतीय का सपना होता है। घर के सपने को पूरा करने के लिए लाखों लोग होम लोन लेते हैं। लेकिन कई बार बड़े घर की चाहत और ज्यादा लोन लेने का फैसला आने वाले 20-30 साल तक आपकी पूरी जिंदगी पर असर डालता है। सिर्फ ईएमआई ही नहीं, बल्कि बैंक को चुकाई जाने वाली कुल रकम भी कई गुना बढ़ जाती है। घर खरीदते समय लोग अक्सर इस बात पर ध्यान देते हैं कि ईएमआई कितनी बनेगी, लेकिन यह नहीं देखते कि पूरी पीरियड में बैंक को कुल कितना पैसा लौटाना होगा। बैंकों को होम लोन के अमाउंट का करीब ढ़ाई गुना पैसा चुकाना पड़ता है। यानी अगर आपने 50 लाख रुपये का लोन लिया है तो बैंक को 20 साल में करीब 1.25 करोड़ रुपये चुकाएंगे।

लोन से ढाई गुना तक क्यों चुकाना पड़ सकता है?

अगर कोई व्यक्ति 50 लाख रुपये का होम लोन 20 से 30 साल की पीरियड के लिए लेता है, तो ब्याज दर के आधार पर उसे बैंक को करीब 1.10 करोड़ से 1.35 करोड़ रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं। यानी कई मामलों में मूल लोन अमाउंट की तुलना में लगभग ढाई गुना रकम बैंक को लौटानी पड़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लंबे पीरियड तक ब्याज लगातार जुड़ता रहता है। यही कारण है कि कम ईएमआई देखकर बड़ा लोन लेना हमेशा समझदारी नहीं होती। ईएमआई भले कम लगे, लेकिन लंबी पीरियड में ब्याज का बोझ काफी बढ़ जाता है।

सिर्फ ईएमआई नहीं, बदल सकती है पूरी जिंदगी!

होम लोन लेने के बाद हर महीने तय तारीख पर ईएमआई भरना अनिवार्य होता है। ऐसे में कई परिवारों को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ती है। बाहर घूमना, छुट्टियां मनाना, बच्चों की अतिरिक्त गतिविधियां, रेस्तरां में खाना या दूसरे शौक धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। कई लोगों को अपने निवेश भी रोकने पड़ते हैं। एसआईपी बंद करनी पड़ती है या रिटायरमेंट के लिए सेविंग टालनी पड़ती है। इसका असर लंबे समय में फंड बनाने की क्षमता पर पड़ता है।

नौकरी बदलने का फैसला भी हो जाता है मुश्किल?

बड़ी ईएमआई सिर्फ जेब पर नहीं बल्कि करियर पर भी असर डालती है। कई लोग बेहतर मौका मिलने के बावजूद नौकरी बदलने का जोखिम नहीं लेते क्योंकि उन्हें हर महीने ईएमआई भरने की चिंता रहती है। कुछ लोग अपना बिजनेस शुरू करने या करियर ब्रेक लेने का सपना भी छोड़ देते हैं। अगर नौकरी चली जाए या इनकम कुछ समय के लिए कम हो जाए तो बड़ी ईएमआई परिवार को परेशानी में डाल देती है।

मेडिकल इमरजेंसी में बढ़ सकती है परेशानी

अगर घर का बड़ा हिस्सा ईएमआई में चला जाता है तो मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई या माता-पिता की देखभाल जैसे अचानक आने वाले खर्चों के लिए सेविंग नहीं बचती। ऐसी स्थिति में कई लोगों को पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ता है, जिससे कर्ज का बोझ और बढ़ जाता है।

बैंक जितना लोन दे, उतना लेना क्या है जरूरी?

बैंक आपकी इनकम के आधार पर लोन की पात्रता तय करता है, लेकिन वह आपकी पूरी जिंदगी की जिम्मेदारियों का आकलन नहीं करता। इसलिए सिर्फ इसलिए बड़ा लोन नहीं लेना चाहिए क्योंकि बैंक देने को तैयार है। आमतौर पर कोशिश करनी चाहिए कि होम लोन की ईएमआई आपकी मंथली इनकम की 30-35 फीसदी ही हो। इससे आपके लिए सेविंग, निवेश और जरूरी खर्चों को निपटाने के लिए पैसा बचा रहता है।

घर खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

जरूरत के हिसाब से घर खरीदें, सिर्फ बड़े घर के आकर्षण में बजट न बढ़ाएं।

डाउन पेमेंट जितना ज्यादा होगा, लोन उतना कम लेना पड़ेगा और ब्याज भी कम देना होगा।

सिर्फ ईएमआई नहीं, पूरे लोन की कुल लागत भी जरूर देखें।

स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, इंटीरियर, मेंटेनेंस और प्रॉपर्टी टैक्स जैसे अतिरिक्त खर्चों को भी बजट में शामिल करें।

कम से कम 6 से 12 महीने का इमरजेंसी फंड जरूर रखें ताकि नौकरी जाने या किसी आपात स्थिति में ईएमआई भरने में दिक्कत न हो।

सपना ऐसा हो जो बोझ न बने

अपना घर खरीदना एक अच्छा फैसला हो सकता है, लेकिन तभी जब वह आपकी आर्थिक क्षमता के भीतर हो। ऐसा घर चुनें जिसकी ईएमआई आपकी जिंदगी पर हावी न हो। अगर होम लोन आपकी बचत, निवेश, करियर, परिवार और मानसिक शांति पर असर डालने लगे, तो यह संकेत है कि आपने अपनी क्षमता से ज्यादा बड़ा कर्ज ले लिया है। याद रखें कि घर आपको सुरक्षा और सुकून देने के लिए होता है, तनाव देने के लिए नहीं। इसलिए होम लोन लेने से पहले सिर्फ आज की इनकम के साथ फ्यूचर का भी ध्यान रखें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN