Home rss business hindi 7% नहीं करीब 9% ग्रोथ रेट भारत की जरूरत; ऐसा क्यों बोले...

7% नहीं करीब 9% ग्रोथ रेट भारत की जरूरत; ऐसा क्यों बोले 2008 के अर्थव्यवस्था संकट की भविष्यवाणी करने वाले नुरिल रुबिनी

5
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • चर्चित अर्थशास्त्री नुरिल रुबिनी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अगर पर्याप्त नौकरी बनाना चाह रहा है तो उसे 9 प्रतिशत के करीब की ग्रोथ रेट हासिल करना होगा
  • उनका कहना है कि 7 प्रतिशत की विकास दर काफी नहीं है

2008 के वित्तीय संकट का अनुमान लगाने वाले चर्चित अर्थशास्त्री नुरिल रुबिनी (Nouriel Roubini) ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनको विश्वास है कि आने वाले दशकों में भारतीय अर्थववस्था नया कीर्तिमान बना सकता है। उनका कहना है कि यह यात्रा सबसे सफल कहानियों में से एक होगी। हालांकि, उन्होंने नौकरियों को लेकर चेताया भी है। नुरिल रुबिनी का कहना है कि अगर देश अपने युवाओं के लिए पर्याप्त नौकरी बनाना चाहता है तो उसे करीब 9 प्रतिशत के ग्रोथ रेट के साथ आगे बढ़ना होगा।

इकनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में नुरिल रुबिनी ने कहा कि भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार, बेहतरीन टैलेंट, शानदार मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स के साथ-साथ इकनॉमी को ओपन करने के प्रयास लॉन्ग टर्म के लिए काफी अच्छा है। यह देश को फायदा पहुंचाएगा।

7% की ग्रोथ रेट काफी नहीं …

दिग्गज अर्थशास्त्री ने कहा कि 7 प्रतिशत की ग्रोथ रेट काफी नहीं है। इंडिया को युवाओं के लिए पर्याप्त नौकरी की व्यवस्था करने के लिए करीब 9 प्रतिशत की ग्रोथ रेट हासिल करना होगा। बता दें, नुरिल रुबिनी ने ऐसे समय में इन बातों को कहा है कि जब एआई की वजह से नौकरियों की परिस्थितियों में काफी परिवर्तन आ रहा है। नए तरीके की नौकरी बन रही है। ऐसे में देश के सामने यह इस समय बड़ी चुनौती है।

भारत बन सकता है निवेशकों का केंद्र

नुरिल रुबिनी को विश्वास है कि तेजी के साथ बदलते ग्लोबल सप्लाई चेन की वजह से भारत को बड़ा मौका मिल सकता है। कई कंपनियां चीन के बाहर भी निवेश की योजना पर काम कर रही हैं। इन कंपनियों के लिए भारत अच्छा विकल्प हो सकता है। उनका मानना है कि भारत का बड़ा घरेलू बाजार उत्पादन करने वाली कंपनियों को आकर्षित करने के लिए काफी है।

नुरिल रुबिनी ने भारत और अमेरिका के मजबूत सम्बंधों की भी वकालत की है। उनका कहना है कि मजबूत रिश्तों का फायदा भारत को मिलेगा। उनका मानना है कि अमेरिकी टैरिफ में गिरावट देखने को मिली थी। बाजार की दबाव की वजह से अमेरिका को एक कंस्ट्रक्टिव अप्रोच रखना होगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN