Source :- LIVE HINDUSTAN
बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 83 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 81 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है। यह गिरावट तब आई है, जब दोनों देशों के बीच अस्थायी समझौता शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में साइन होने वाला है, हालांकि अभी तक दोनों पक्षों ने डील के डिटेल्स को सार्वजनिक नहीं किया है।
ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक मॉर्गन स्टेनली और गोल्डमैन सैक्स जैसे प्रमुख वॉल स्ट्रीट बैंकों ने आने वाली तिमाहियों के लिए तेल की कीमतों के अपने अनुमान कम कर दिए हैं। गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि जुलाई के अंत तक फारस की खाड़ी से निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर पर पहुंच जाएगा, जो उनके पिछले अनुमान से एक महीने पहले की बात है।
तेल की कीमतों का नया पूर्वानुमान
मॉर्गन स्टेनली ने भविष्यवाणी की है कि समझौते के बाद, जुलाई और सितंबर के बीच डेटेड ब्रेंट औसतन 90 डॉलर प्रति बैरल रहेगा, जो पहले के 100 डॉलर के अनुमान से कम है। चौथी तिमाही का अनुमान 15 डॉलर घटाकर 80 डॉलर कर दिया गया है।
बैंक के विश्लेषकों का कहना है कि अभी भी काफी कुछ बातचीत होनी बाकी है और प्रमुख जोखिम बने हुए हैं, लेकिन अभी के लिए यह संघर्ष में कमी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से तेल निर्यात में वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्हें उम्मीद है कि सितंबर तक 50% और दिसंबर तक 80% उत्पादन वापस आ जाएगा।
कच्चे तेल की कीमतें लगातार चौथे दिन गिरीं
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार चौथे दिन गिर रही हैं, जो इस साल की सबसे लंबी गिरावट है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को माना जा रहा है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का रास्ता साफ हो गया है। इससे तेल की सप्लाई बढ़ने की संभावना बढ़ गई है, जिसका असर कीमतों पर साफ देखने को मिल रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह गिरावट?
भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल कीमतों में गिरावट से पेट्रोल-डीजल पर दबाव कम हो सकता है। आयात बिल घट सकता है, महंगाई पर राहत मिल सकती है और रुपये को समर्थन मिल सकता है। बता दें कच्चे तेल की कीमतों वजह से भारत में पेट्रोल और डीजल 7.50-7.50 रुपये प्रति लीटर महंगे हो चुके हैं। इसके अलावा कच्चे तेल पर आधरित उद्योगों की प्रोडक्शन लागत भी काफी बढ़ गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन में पत्रकारों से कहा कि जलडमरूमध्य शुक्रवार तक पूरी तरह साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वहां पहले से ही कई लेन खुली हैं और यह मार्ग टोल-फ्री होगा।
युद्ध के दौरान की बढ़त हुई काफी कम
तेल की कीमतों में यह गिरावट इसे मार्च की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर ले आई है। संघर्ष के दौरान हुई अधिकांश बढ़त खत्म हो गई है, जिससे महंगाई के दबाव में कमी आई है। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब फेडरल रिजर्व के नीति निर्माता इस सप्ताह ब्याज दरों पर विचार कर रहे हैं।
फिर भी शांति समझौते पर अनिश्चितता बरकरार
हालांकि, इस अस्थायी समझौते को लागू करने को लेकर कई सवाल अभी भी बने हुए हैं। शिपिंग सुरक्षा, परिचालन नियमों और इस बात को लेकर चिंताएं हैं कि क्या यह समुद्री मार्ग, जो युद्ध से पहले वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा वहन करता था, वास्तव में टोल-फ्री रहेगा।
डील की डिटेल्स अभी तक बाहर नहीं आने के कारण इसने बाजार को सतर्क बनाए रखा है। फारस की खाड़ी के ऊर्जा अधिकारियों ने ब्लूमबर्ग बताया कि उन्हें खरीदारों से यह पूछताछ करने वाले अनगिनत संदेश मिले हैं कि क्या कच्चा तेल फिर से होर्मुज के माध्यम से भेजा जा सकता है। शिपिंग कार्यकारियों और व्यापारियों ने कहा कि वे इस मार्ग पर जहाज भेजने से पहले अधिक स्पष्टता चाहते हैं।
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