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देश में बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें? अहम तेल पाइपलाइन पर हमले की खबर!

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की एक जरूरी फ्यूल पाइपलाइन सिस्टम के पास मौजूद पंपिंग स्टेशनों को प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इस घटना की पुष्टि अभी पूरी तरह पब्लिक तौर पर नहीं हुई है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि शुरुआती आकलन में पाइपलाइन के साथ स्थित कुछ पंपिंग सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका है। सैटेलाइट तस्वीरों ने भी इस घटना को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार को ली गई तस्वीरों में एक स्थान पर आग से काफी नुकसान के संकेत दिखाई दिए, जबकि उससे एक दिन पहले एक अन्य जगह से काला धुआं निकलता नजर आया था।

सप्लाई प्रभावित होने की आशंका

इस घटना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन इस समय देश के लिए बेहद अहम भूमिका निभा रही है। ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कारण सेक्टर में समुद्री तेल ट्रांसपोर्ट पर जोखिम बढ़ा है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते से होने वाली सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे माहौल में सऊदी अरब ने बड़ी मात्रा में कच्चे तेल को फारस की खाड़ी से सीधे टैंकरों में भेजने के बजाय अपनी पाइपलाइन के जरिए लाल सागर स्थित Yanbu बंदरगाह तक पहुंचाना शुरू किया है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 50 लाख बैरल प्रतिदिन तेल को इस वैकल्पिक मार्ग से भेजा जा रहा है।

घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं

अगर पाइपलाइन या उससे जुड़ी पंपिंग सुविधाओं को गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो इससे सऊदी अरब की तेल आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पाइपलाइन को सीधे कितना नुकसान हुआ है और मरम्मत में कितना समय लगेगा। हमले के पीछे कौन जिम्मेदार है, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी अधिकारियों द्वारा घटना से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने की बात कही गई है।

पूरी तस्वीर सामने आने में अभी समय

सैटेलाइट तस्वीरों में पाइपलाइन के आसपास कई जगह आग दिखाई देने की रिपोर्ट भी सामने आई है। हालांकि, इनमें से कुछ स्थान आपात स्थिति में तेल या गैस जलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फ्लेयर पिट हो सकते हैं, इसलिए हर आग को हमले से जोड़ना सही नहीं होगा। यही वजह है कि घटना की पूरी तस्वीर सामने आने में अभी समय लग सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर

इस बीच कच्चे तेल की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। मध्य-पूर्व में सप्लाई बाधित होने की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी हैं। अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल उत्पादन या परिवहन पर और असर पड़ता है, तो कीमतों में और उतार-चढ़ाव संभव है। इसका असर तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ सकता है, क्योंकि महंगा कच्चा तेल आयात बिल, महंगाई और ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ा सकता है।

फ्यूल मार्केट में बढ़ सकती है अस्थिरता

फिलहाल, बाजार की नजर सऊदी तेल सुविधाओं को हुए वास्तविक नुकसान, मरम्मत की स्थिति और क्षेत्र में आगे होने वाली सैन्य गतिविधियों पर है। अगर सप्लाई रूट सुरक्षित रहते हैं, तो बाजार का दबाव कुछ कम हो सकता है, लेकिन किसी बड़े फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर दोबारा हमला हुआ, तो ग्लोबल फ्यूल मार्केट में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN