Source :- LIVE HINDUSTAN
अगर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले टैक्सपेयर्स को कई बड़े बदलावों का सामना करना पड़ सकता है। ये बदलाव फॉर्म ITR-1 (सहज), ITR-2, ITR-3 और ITR-4 (सुगम) में हुआ है। आइए इसके बारे में डिटेल में जान लेते हैं।
ITR-1 (सहज): टैक्सपेयर्स अब दो हाउस प्रॉपर्टी तक से होने वाली इनकम की जानकारी दे सकते हैं और फिर भी इसी फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। पहले, जिन टैक्सपेयर्स की इनकम एक से ज्यादा हाउस प्रॉपर्टी से होती थी, उन्हें ITR-2 भरना पड़ता था। जो टैक्सपेयर्स सेक्शन 112A के दायरे में आने वाले लिस्टेड इक्विटी शेयरों या इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड से लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) कमाते हैं, वे अब ITR-1 में ऐसे गेन की जानकारी दे सकते हैं, बशर्ते फाइनेंशियल ईयर के दौरान यह गेन 1.25 लाख रुपये से ज़्यादा न हो।
सेक्शन 112A के दायरे में आने वाले लिस्टेड इक्विटी शेयरों या इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड से लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) कमाने वाले टैक्सपेयर्स अब ITR-1 में ऐसे गेन की जानकारी दे सकते हैं, बशर्ते फाइनेंशियल ईयर के दौरान यह गेन 1.25 लाख रुपये से अधिक न हो। इसके साथ ही ऑप्शनल एड्रेस, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की जानकारी देना भी संभव होगा। विदेशों से पेंशन इनकम पाने वाले टैक्सपेयर्स को अब ITR-1 में अपने विदेशी पेंशन अकाउंट्स की जानकारी देने की जरूरत नहीं है।
ITR-2
इस फॉर्म में कैपिटल गेन्स की ज्यादा डिटेल देनी होगी। एसेट के प्रकार के आधार पर, खरीदने की तारीख, ट्रांसफर की तारीख, बिक्री से मिली रकम, खरीदने की लागत और लागू टैक्स नियमों जैसी जानकारी अलग से बतानी पड़ सकती है। फॉर्म में अब शेयर बायबैक ट्रांजैक्शन से हुए नुकसान की जानकारी देने के लिए एक अलग फील्ड जोड़ा गया है।
पहले, शेयर बायबैक से शेयरहोल्डर्स को मिली किसी भी रकम को ‘डीम्ड डिविडेंड इनकम’ माना जाता था और उस पर व्यक्ति के इनकम टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता था। हालांकि, 1 अप्रैल 2026 से शेयर बायबैक से मिली रकम पर ‘डीम्ड डिविडेंड’ के बजाय कैपिटल गेन्स के नियमों के तहत टैक्स लगेगा। जिन रेजिडेंट टैक्सपेयर्स के पास विदेशी एसेट, विदेशी बैंक अकाउंट, विदेशी शेयर, भारत के बाहर फाइनेंशियल इंटरेस्ट हैं या जो विदेशी इनकम कमाते हैं, उन्हें रिटर्न में ये जानकारी देना जारी रखना होगा। ITR-1 की तरह ही, ITR-2 भरने वाले टैक्सपेयर्स अब अतिरिक्त पता, मोबाइल नंबर और ईमेल की जानकारी दे सकते हैं।
ITR-3 भरने वाले कारोबारियों और ट्रेडर्स के लिए भी नियम सख्त हुए हैं। अब फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O), इंट्राडे ट्रेडिंग, कमोडिटी ट्रेडिंग और करेंसी ट्रेडिंग की आय को अलग-अलग दिखाना होगा। इसके अलावा बड़े वित्तीय लेन-देन और व्यवसायिक गतिविधियों से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी भी देनी होगी।
इसके अलावा, ITR-4 (सुगम) में सबसे बड़ा बदलाव बैंक खाते में 31 मार्च 2026 तक उपलब्ध शेष राशि (Bank Balance) का अनिवार्य खुलासा है। साथ ही दो मकानों की आय और 1.25 लाख रुपये तक के LTCG को भी इस फॉर्म में रिपोर्ट किया जा सकेगा।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN







