Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- SAT में जेन स्ट्रीट मामले की सुनवाई के दौरान SEBI ने कहा कि ट्रेडिंग फर्म को जांच की प्रॉसेस पर सवाल उठाने के बजाय अपने ट्रेडिंग कंडक्ट और कथित मार्केट कैप के आरोपों का जवाब देना चाहिए
- SEBI की ओर से सीनियर एडवोकेट ने इस स्थिति के लिए हिंदी कहावत “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” का इस्तेमाल किया
जेन स्ट्रीट और SEBI के बीच चल रहे विवाद में मंगलवार को SAT (Securities Appellate Tribunal) में सुनवाई के दौरान बाजार नियामक ने अपना पक्ष रखा। SEBI ने कहा कि जेन स्ट्रीट (Jane Street) मामले की जांच के तरीके पर सवाल उठाकर मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। नियामक के मुताबिक, फिलहाल फोकस इस बात पर होना चाहिए कि कंपनी ने बाजार में किस तरह ट्रेडिंग (Trading) की और क्या उसका तरीका मार्केट कैप के दायरे में आता है। SEBI की ओर से सीनियर एडवोकेट गौरव जोशी ने दलील दी कि जेन स्ट्रीट को पहले अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने इस स्थिति के लिए हिंदी कहावत “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” का इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि मामला ट्रेडिंग कंडक्ट से जुड़ा है, लेकिन कंपनी जांच करने वाले रेगुलेटर की प्रक्रिया पर सवाल उठाकर बहस को दूसरी दिशा में ले जा रही है।
SEBI ने किन ट्रेडिंग स्ट्रेटजी पर सवाल उठाए?
SEBI ने SAT को बताया कि इंडेक्स ऑप्शन (Index Options) की एक्सपायरी वाले दिनों में जेन स्ट्रीट (Jane Street) से जुड़ी एंटटीज ने कथित तौर पर ऐसी ट्रेडिंग स्ट्रेटजी अपनाईं, जिन्हें नियामक ने मार्केट कैप से जोड़ा है। एक स्ट्रेटजी के तहत करीब ₹4,370 करोड़ के बैंक निफ्टी कॉन्स्टिट्युएंट स्टॉक्स (Bank Nifty Constituent Stocks) लगभग दो घंटे की अवधि में खरीदे गए। इसी दौरान करीब ₹32,114 करोड़ की बियरिश ऑप्शन पोजिशन ली गई।
SEBI का आरोप है कि बाद में शेयर्स की बिक्री से उनकी कीमतों पर दबाव आया और ऑप्शन को इससे फायदा हुआ। नियामक के अनुसार, जांच की अवधि में इन स्ट्रेटजी के जरिए कुल करीब ₹4,843 करोड़ के लाभ से जुड़े आरोप हैं। SEBI ने यह भी कहा कि भारतीय एंटटीज को कैश और फ्यूचर मार्केट में नुकसान हुआ, जबकि सिंगापुर एंटटीज को ऑप्शन में फायदा हुआ। नियामक का कहना है कि जेन स्ट्रीज को ट्रेडिंग स्ट्रक्चर और उसके उद्देश्य की व्याख्या करनी चाहिए।
अतिरिक्त डॉक्यूमेंट की मांग पर SEBI की आपत्ति
सुनवाई के दौरान जेन स्ट्रीज की ओर से मांगे गए अतिरिक्त डॉक्यूमेंट्स का मुद्दा भी उठा। SEBI ने कहा कि उसने अंतरिम ऑर्डर में भरोसा किए गए डॉक्यूमेंट्स के अलावा इंस्पेक्शन के दौरान और उसके बाद 10 GB से अधिक अतिरिक्त मटेरियल उपलब्ध कराया है। नियामक का आरोप है कि एक डॉक्यूमेंट्स देने के बाद उससे जुड़े ईमेल और फिर उसके अटैचमेंट्स की मांग की जा रही है।
SEBI ने इसे मामले को लंबा खींचने वाली प्रक्रिया बताया और कहा कि अभी मामला प्री-शो कॉज नोटिस और इंवेस्टिगेशन स्टेज में है। उसके अनुसार, इस चरण में रेगुलेटर के पास मौजूद हर डॉक्यूमेंट उपलब्ध कराना अनिवार्य नहीं है। SEBI ने यह भी कहा कि उसने शुरुआती NSE और अंतरिम सर्विलांस रिपोर्ट्स (Internal Surveillance Reports) भी उपलब्ध कराई हैं, भले ही अंतरिम ऑर्डर तैयार करते समय उन पर निर्भरता नहीं थी।
SEBI बोला- मार्केट मैनिपुलेशन ‘कैट एंड माउस गेम’
SEBI ने मार्केट मैनिपुलेशन की जांच को ‘Cat and Mouse Game’ बताते हुए कहा कि ट्रेडिंग स्ट्रेटजी लगातार विकसित होती रहती हैं और रेगुलेटर को नए तरीकों तथा संभावित लूपहोल्स पर नजर रखनी पड़ती है। नियामक का तर्क है कि नियमों की परिभाषा व्यापक है और बाजार में नई रणनीतियों के सामने आने के साथ उनकी जांच भी जरूरी होती है।
SEBI ने जुलाई 2025 में इस मामले में अंतरिम ऑर्डर (Interim Order) जारी किया था, लेकिन कंफर्मेटरी ऑर्डर (Confirmatory Order) अभी तक नहीं आया है। डॉक्यूमेंट के इंस्पेक्शन को लेकर चल रहे प्रोसीजर डिस्प्यूट (Procedural Dispute) के कारण प्रक्रिया में देरी हुई है। जेन स्ट्रीट (Jane Street) ने अपने बचाव के लिए SEBI की जांच से जुड़े अतिरिक्त रिकॉर्ड तक पहुंच की मांग की है। SEBI के बुधवार तक अपनी दलीलें पूरी करने की उम्मीद है, जिसके बाद जेन स्ट्रीट (Jane Street) को आगे जवाब देने का मौका मिल सकता है।
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