Source :- LIVE HINDUSTAN
कच्चे तेल के दाम में लगी आग की आंच अभी भारत के लोगों पर नहीं पड़ी है। लेकिन, पड़ोस के लोगों की जेब अभी से जलने लगी है। बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल में पेट्रोल के दाम अमेरिका से भी ज्यादा हो गए हैं।
ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज डॉट कॉम के मुताबिक तेल के दाम बढ़ने का असर फिर से पेट्रोल-डीजल के रेट पर पड़ने लगा है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार है और अमेरिकी तेल 100 डॉलर के पास पहुंच रहा है। ऐसे में दुनिया भर के देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़ रहे हें। भारत में अभी 3 महीने से भी अधिक समय से रेट जस के तस हैं।
अभी भारत की बात करें तो बेंचमार्क दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये लीटर है। ग्लोबल प्राइसेज के डेटा के मुताबिक भारत में पेट्रोल का एवरेज प्राइस 108 रुपये है। अगर पड़ोसी देशों की बात करें तो भारत से सस्ता पेट्रोल केवल भूटान में है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 99.05 रुपये है।
वहीं, बांग्लादेश में 112, म्यांमार में 115.56, चीन में 122.74, पाकिस्तान में 124.51 और नेपाल में 125.53 रुपये लीटर है। वहीं, श्रीलंका में पेट्रोल 137 रुपये लीटर के पार पहुंच गया है। जबकि, अभी अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 110.69 रुपये लीटर है। दुनिया में पेट्रोल का औसत रेट 147.68 रुपये लीटर है।
डीजल के रेट में भी उबाल
भूटान में 1 लीटर डीजल की कीमत 104.38 रुपये हे गई है। जबकि, चीन में 109.57, नेपाल में 125.53, पाकिस्तान में 131.89, श्रीलंका में 138 रुपये लीटर है। अमेरिका में डीजल 140.45 रुपये लीटर है तो भारत में औसत रेट 98.32 रुपये। अपने पड़ोसी बांग्लादेश में ही डीजल सस्ता है। यहां एक लीटर डीजल की कीमत 88.83 रुपये है।
भारत पर क्यों नहीं हुआ असर
भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक देश है। ईरान-अमेरिका-युद्ध के दौरान जब कच्चे तेल के दाम अंधाधुंध बढ़ रहे तो पाकिस्तान, बंग्लादेश, चीन, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, भूटान जैसे पड़ेसियों के साथ-साथ दुनिया के तमाम देश महंगाई बोझ जनता पर डाल रहे थे। उस समय भारत के 5 राज्यों में चुनाव चल रहे थे और पूरे 76 दिन तक पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े।
महंगाई का बोझ ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड जैसी ईंधन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पडेगा। अभी सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब ₹5 और डीजल पर ₹23 प्रति लीटर का नुकसान उठा रही हैं।
सरकार ने सारा बोझ अपने ऊपर लिया और यहां तक पेट्रोल-डीजल से एक्साइज ड्यूटी भी 10-10 रुपये कम कर दिया। चुनाव खत्म होने के बाद मई में तेल की कीमतें चार बार में 7.50-7.50 रुपये बढ़े। अब न तो कहीं चुनाव है और न ही कोई और बड़ा इवेंट। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दाम में इजाफा होने के आसार प्रबल हैं।
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