Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- SBI Loan Interest Rate Hike: घर खरीदने के लिए कर्ज लेने वालों से लेकर पहले से EMI भर रहे ग्राहकों तक के लिए SBI की नई ब्याज दरें आज से लागू हो गई हैं
- आइए समझें आपकी मासिक किस्त यानी EMI पर कितना असर पड़ सकता है
SBI Loan Interest Rate Hike: अगर आपने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से होम लोन या कोई दूसरा कर्ज ले रखा है, तो आपकी जेब पर बोझ बढ़ सकता है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने अपनी प्रमुख लेंडिंग ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है, जिसका सीधा असर फ्लोटिंग रेट वाले कर्जदारों की EMI या लोन चुकाने की अवधि पर पड़ सकता है। बैंक ने अपनी प्रमुख लेंडिंग रेट्स में 25 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी की है।
ऐसे में घर खरीदने के लिए कर्ज लेने वालों से लेकर पहले से EMI भर रहे ग्राहकों तक के लिए यह बदलाव अहम है। जानिए SBI की नई ब्याज दरें क्या हैं और आपकी मासिक किस्त पर कितना असर पड़ सकता है। बता दें नई दरें 15 अक्टूबर 2026 यानी आज से लागू हैं।
RBI के रेपो रेट बढ़ाने के बाद SBI का फैसला
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद SBI ने अपनी लेंडिंग दरों में बदलाव किया है। इससे फ्लोटिंग रेट पर कर्ज लेने वाले ग्राहकों की उधारी लागत बढ़ सकती है। हालांकि, ब्याज दर और EMI में वास्तविक बदलाव ग्राहक के लोन एग्रीमेंट और रीसेट की तारीख पर निर्भर करेगा।
SBI की नई EBLR और RLLR दरें
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की वेबसाइट के मुताबिक SBI ने एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड लेंडिंग रेट (EBLR) और रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। ऐसे में EBLR और RLLR से जुड़े फ्लोटिंग रेट लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। ग्राहक की अंतिम ब्याज दर में क्रेडिट रिस्क प्रीमियम और लागू अन्य कंपोनेंट का भी योगदान होता है।
MCLR की दरों में भी बदलाव
SBI ने MCLR से जुड़ी कुछ अवधि की ब्याज दरों में भी 0.15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। ओवरनाइट और एक महीने की दरों में बदलाव नहीं किया गया है।
| लोन की अवधि | पुराना रेट (%) | नया रेट (%) |
|---|---|---|
| ओवर नाइट | 7.85 | 7.85 |
| 1 महीना | 7.85 | 7.85 |
| 3 महीने | 8.25 | 8.40 |
| 6 महीने | 8.60 | 8.75 |
| 1 साल | 8.70 | 8.85 |
| 2 साल | 8.75 | 8.90 |
| 3 साल | 8.80 | 8.95 |
कितनी बढ़ेगी होम लोन की EMI?
होम लोन की EMI में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह लोन की बकाया रकम, ब्याज दर और बाकी अवधि पर निर्भर करता है। इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं।
एक सरकारी बैंक के ब्रांच मैनेजर पंकज पांडेय ने इस ऐसे समझाया, “ मान लीजिए किसी ग्राहक ने 20 साल के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है और उसकी ब्याज दर 8.50% से बढ़कर 8.75% हो जाती है। अगर बाकी सभी शर्तें समान रहें और बैंक EMI में बदलाव करे, तो उसकी मासिक किस्त में लगभग 800 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।”
इस उदाहरण में EMI करीब 43,391 रुपये से बढ़कर 44,192 रुपये हो सकती है। यह केवल अनुमान है; वास्तविक EMI बैंक की गणना और ग्राहक के लोन की शर्तों के अनुसार अलग होगी।
किन ग्राहकों पर पड़ेगा असर?
EBLR और RLLR वाले ग्राहक: इन बेंचमार्क से जुड़े फ्लोटिंग रेट लोन की ब्याज दर रीसेट होने पर बढ़ सकती है।
MCLR वाले ग्राहक: इन ग्राहकों पर असर संबंधित लोन की अवधि और अगली रीसेट तारीख पर निर्भर करेगा।
फिक्स्ड रेट वाले ग्राहक: उनकी ब्याज दर में तत्काल बदलाव जरूरी नहीं है। यह उनके लोन एग्रीमेंट की शर्तों पर निर्भर करेगा।
EMI बढ़ने से बचने के लिए क्या करें?
अगर आपकी EMI बढ़ती है, तो बैंक से नई ब्याज दर और रीसेट की तारीख की जानकारी लें। अतिरिक्त रकम उपलब्ध होने पर होम लोन का आंशिक प्रीपेमेंट करने से मूलधन और भविष्य के ब्याज का बोझ कम किया जा सकता है। दूसरे बैंक में लोन ट्रांसफर करने से पहले प्रोसेसिंग फीस, अन्य शुल्क और कुल बचत की तुलना जरूर करें।
SBI की नई लेंडिंग दरों से कई फ्लोटिंग रेट कर्जदारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। हालांकि, सभी ग्राहकों की EMI तुरंत नहीं बढ़ेगी। अपनी लोन श्रेणी, ब्याज दर और रीसेट की तारीख की जांच करके ही संभावित असर का आकलन करें।
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