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इस देश ने खेला बड़ा दांव! 26 साल बाद तेल की कीमत में की इतनी बड़ी कटौती, भारत में भी सस्ता होगा पेट्रोल?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी कटौती कर दुनिया के तेल बाजार में हलचल मचा दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति तेजी से बढ़ रही है और खरीदारों को आकर्षित करने के लिए उत्पादक देशों के बीच प्रतिस्पर्धा भी तेज हो गई है। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको (Saudi Aramco) ने अगस्त 2026 के लिए एशियाई ग्राहकों को मिलने वाले अपने सबसे लोकप्रिय अरब लाइट क्रूड (Arab Light Crude) की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की भारी कटौती की है। यह पिछले कम-से-कम 26 सालों की सबसे बड़ी कीमत कटौती मानी जा रही है। इससे पहले बाजार एक्सपर्ट को केवल 8 डॉलर प्रति बैरल की कटौती की उम्मीद थी।

दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आई है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम (Ceasefire) और हॉर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के दोबारा खुलने को माना जा रहा है। युद्ध के दौरान इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही लगभग ठप हो गई थी, जिससे पूरी दुनिया में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी। लेकिन अब हालात सामान्य होने के बाद तेल की सप्लाई फिर से तेज हो गई है और बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति (Oversupply) का दबाव बन गया है।

युद्ध के दौरान सऊदी अरब ने अपने अधिकांश तेल निर्यात को लाल सागर (Red Sea) स्थित Yanbu Port के जरिए भेजना शुरू कर दिया था, क्योंकि फारस की खाड़ी के रास तनुरा बंदरगाह (Ras Tanura Port) से जहाजों का संचालन प्रभावित हो गया था। अब हॉर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) खुलने के बाद अरामको (Aramco) ने फिर से अपनी सामान्य सप्लाई शुरू कर दी है और तेल निर्यात लगभग युद्ध-पूर्व स्तर के 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इससे एशियाई देशों में तेल की उपलब्धता बढ़ गई है और कीमतों पर दबाव बना है।

इस बीच OPEC+ संगठन, जिसमें सऊदी अरब और रूस प्रमुख भूमिका निभाते हैं, ने अगस्त महीने के लिए भी तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। पहले युद्ध के दौरान उत्पादन बढ़ाने का फैसला केवल औपचारिक माना जा रहा था, क्योंकि कई खाड़ी देशों के लिए सप्लाई बढ़ाना संभव नहीं था। लेकिन, अब समुद्री मार्ग सामान्य होने के बाद सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की स्थिति में हैं। इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार में और अधिक कच्चा तेल उपलब्ध हो सकता है।

एक्सपर्ट का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह नरम बनी रहती हैं, तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में सस्ते कच्चे तेल से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। साथ ही सरकार का आयात बिल कम होगा, महंगाई पर भी दबाव घटेगा और अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है।

हालांकि, तेल बाजार पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर रहता है। यदि पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ता है या OPEC+ भविष्य में उत्पादन घटाने का फैसला करता है, तो कीमतें दोबारा तेजी पकड़ सकती हैं। फिलहाल, सऊदी अरब की इस ऐतिहासिक कीमत कटौती ने वैश्विक तेल बाजार में नई प्रतिस्पर्धा शुरू कर दी है और आने वाले महीनों में इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN