Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- पिछले कुछ साल में पैटर्न रहा है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू स्तर पर संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार संभल जाता था
- हालांकि, इस बार घरेलू निवेशकों का उत्साह भी थोड़ा कम है
Stock Market Crash: शेयर बाजार में एक बार फिर से बड़ी गिरावट आई है। सप्ताह के चौथे दिन गुरुवार को दोपहर 1 बजे के बाद सेंसेक्स 1200 अंक से ज्यादा टूटकर 71300 अंक के नीचे आ गया। वहीं, निफ्टी की बात करें तो 350 अंक से ज्यादा लुढ़ककर 22300 अंक के नीचे ट्रेड करने लगा। इस हालात में निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए। इंट्रा-डे में सेंसेक्स ने 71,292.88 अंक के निचले स्तर को टच किया। यह इंडेक्स के 52 हफ्ते का लो भी है।
हालांकि, कुछ ही देर में निचले स्तर से रिकवरी भी आई। इसके बावजूद 3 बजे के आसपास सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूटकर ट्रेड कर रहा था। निफ्टी भी थोड़ा रिकवर हुआ लेकिन 200 अंक तक टूटकर ट्रेडिंग कर रहा था। बहरहाल, बाजार के बिकवाली मोड के मुख्य कारण जान लेते हैं।
विदेशी निवेशकों का मोहभंग
शेयर बाजार में मचे हाहाकार की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों का मोहभंग है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों से करीब ₹10,148 करोड़ की निकासी की। इससे एक दिन पहले मंगलवार को भी उन्होंने करीब ₹10,743 करोड़ की बिकवाली की थी। कहने का मतलब है कि सिर्फ दो दिनों में विदेशी निवेशकों की बिक्री करीब ₹20,891 करोड़ रही।
घरेलू निवेशकों की कम दिलचस्पी
पिछले कुछ साल में पैटर्न रहा है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू स्तर पर संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार संभल जाता था। हालांकि, इस बार घरेलू निवेशकों का भी उत्साह ठंडा दिख रहा है। ऐसे में विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार से निकलने का ट्रेंड निवेशकों को डराने लगा है। बता दें कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर दूसरे बाजारों और डेट इंस्ट्रूमेंट्स की ओर रुख कर रहे हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को दे रहे प्राथमिकता
एक्सपर्ट बताते हैं कि विदेशी निवेशक अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर करीब 5.31 फीसदी तक पहुंच गई, जो 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। यह परफॉर्मेंस निवेशकों के आकर्षित कर रह है। बता दें कि अमेरिकी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है तो वैश्विक निवेशकों के लिए अमेरिकी डेट मार्केट ज्यादा आकर्षक हो सकता है। यही वजह है कि भारतीय मार्केट से विदेशी निवेशकों की बिकवाली में तेजी आई है।
– ईरान और अमेरिका के बीच जंग में भी सुलह को लेकर पॉजिटिव रेस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। जंग के ऐसे में कच्चे तेल के दाम में उछाल बरकरार है। ये हालात भी भारतीय बाजार को प्रभावित कर रहे हैं।
-बाजार की गिरावट को बढ़ाने में ऑटो सेक्टर के शेयरों की अहम भूमिका रही। सितंबर के ऑटो बिक्री आंकड़े बाजार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरने के बाद महिंद्रा एंड महिंद्रा और Maruti Suzuki जैसे बड़े ऑटो शेयरों में तेज गिरावट आई। वहीं, Nifty Auto इंडेक्स भी 4 फीसदी से ज्यादा टूट गया।
-डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में भी कमजोरी से भारतीय बाजार डगमगाया हुआ है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में निवेश की लागत और जोखिम को प्रभावित कर सकता है।
2001 जैसे हालात?
यह लगातार चौथा कारोबारी दिन रहा जब बाजार बिकवाली मोड में है। लगातार बिकवाली के कारण भारतीय बाजार आठवें सप्ताह भी गिरावट के साथ बंद होने की ओर बढ़ रहा है। साल 2001 के डॉट-कॉम क्रैश के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है। बाजार की गिरावट ने साल 2020 के कोविड-19 क्रैश और 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस को भी पीछे छोड़ दिया है।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




