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मार्केट खुलते ही आज सोना-चांदी के गिरे भाव, ₹1.44 लाख के नीचे आया गोल्ड

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Source :- LIVE HINDUSTAN

सोमवार सुबह ग्लोबल और डोमेस्टिक मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव देखा गया। एमसीएक्स पर सोने वायदा भाव 0.40 प्रतिशत गिरकर 1,43,583 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी का वायदा भाव 0.26 प्रतिशत फिसलकर 2,22,899 रुपये प्रति किलो के आसपास आ गया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,064.47 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, वहीं स्पॉट सिल्वर 1.1 प्रतिशत टूटकर 58.50 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई।

सोने-चांदी में गिरावट के 3 अहम कारण

फारस की खाड़ी में ताजा हमलों से बढ़ा तनाव: इस गिरावट की मुख्य वजह सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच हुए ताजा हमले रहे। अमेरिकी सेना ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की, जिसे होर्मुज स्ट्रेट के पास जहाजों पर कथित ईरानी ड्रोन हमलों का जवाब बताया गया।

जवाबी कार्रवाई के दौरान कतर के कच्चे तेल से भरा एक टैंकर को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से एक्सियोस ने बाद में बताया कि दोनों पक्षों ने हमले रोकने और मंगलवार को दोहा में बैठक करने पर सहमति बना ली है।

तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई की आशंका: अमेरिका-ईरान तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को एक बार फिर ऊपर धकेल दिया। ब्रेंट क्रूड आधा प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 72 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। तेल के दाम बढ़ने से महंगाई की चिंता गहरा गई, जिसने बाजारों में यह अटकलें तेज कर दीं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक, कारोबारियों को इस साल तीन बार दर वृद्धि की उम्मीद है।

डॉलर और बॉन्ड यील्ड का दबाव: फेड दर वृद्धि की संभावनाओं के चलते डॉलर इंडेक्स लगातार ऊंचा बना रहा, जो जून में करीब एक साल की सबसे बड़ी मासिक बढ़त दर्ज करने जा रहा है। हालांकि, अमेरिकी महंगाई के ताजा आंकड़ों ने कुछ राहत दी। फेडरल रिजर्व का पसंदीदा महंगाई का पैमाना पर्सनल कंजप्शन एक्सपेंडिचर मूल्य सूचकांक मई में पिछले महीने की तुलना में 0.4 प्रतिशत बढ़ा, जो अनुमानों के अनुरूप ही रहा। इसके बाद ट्रेजरी यील्ड में हल्की नरमी देखने को मिली, पर डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सोने की चाल पर दबाव बना रहा।

सोना धीरे-धीरे मजबूत होगा

ग्लोबल एक्स ईटीएफ ऑस्ट्रेलिया के विश्लेषक जस्टिन लिन का कहना है कि हालात बिगड़ने के बाद भी सोने का 4,000 डॉलर के ऊपर बने रहना यह संकेत देता है कि मामूली गिरावट पर खरीदार लौट आए हैं और इस स्तर को बचाने को तैयार हैं। उनके अनुसार, “मुझे उम्मीद है कि मध्य पूर्व की अस्थिरता के प्रति सोना धीरे-धीरे और मजबूत होता जाएगा, खासकर अब जबकि इसने सालाना आधार पर अब तक की सारी बढ़त गंवा दी है और तेजी से कमाई चाहने वाले निवेशक काफी हद तक बाहर निकल चुके हैं।”

गौरतलब है कि फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से सोना करीब 23 प्रतिशत नीचे आ चुका है, क्योंकि ऊंची ऊर्जा कीमतों ने महंगाई बढ़ाई और केंद्रीय बैंकों के लंबे समय तक दरें ऊंची रखने की उम्मीदें बढ़ाईं।

रेलिगेयर सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी के अनुसार, “होर्मुज स्ट्रेट पर ताजा हमलों ने तेल की कीमतें बढ़ाईं और महंगाई की चिंता फिर जगा दी, जिससे सोने में गिरावट आई। अब सबकी निगाहें अमेरिकी मासिक रोजगार रिपोर्ट और आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई पर हैं, जिनसे फेड की मौद्रिक नीति को लेकर और सुराग मिल सकते हैं।”

आगे कैसी रह सकती है सोने-चांदी की चाल

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को 4,055 और 4,010 डॉलर पर सपोर्ट है, जबकि 4,135 और 4,180 डॉलर पर रेजिस्टेंस बना रहेगा। चांदी के लिए 57.40 और 55.80 डॉलर का सपोर्ट तथा 61.20 और 62.80 डॉलर का रेजिस्टेंस।

एमसीएक्स पर सोने को 1,43,300 और 1,42,400 रुपये पर सपोर्ट तथा 1,45,150 और 1,46,200 रुपये पर रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है। चांदी के लिए 2,20,000 और 2,16,600 रुपये का सपोर्ट और 2,26,000 और 2,29,100 रुपये पर रेजिस्टेंस है।

(डिस्‍क्‍लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। कमोडिटी मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

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