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साल 1960 हिंदी सिनेमा के लिए बेहद खास था। इस साल बॉक्स ऑफिस पर कई बड़ी फिल्में रिलीज हुई। इसी साल दिलीप कुमार और मधुबाला की फिल्म मुगल-ए आजम आई थी। बरसात की रात, गुरु दत्त की चौदहवीं का चांद जैसी यादगार फिल्में रिलीज हुई थीं। ये वो फिल्में थीं जिन्होंने हिंदी सिनेमा और उस समय के म्यूजिक को नया रूप दिया। इन फिल्मों का म्यूजिक आज तक अमर है। उस साल ऐसे गीत बने जिसे दुनिया में कोई दूसरा दोबारा नहीं बना पाया। इसी साल ‘चौदहवी का चांद हो या आफताब हो’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’ जैसे गानों ने जन्म लिया था। लेकिन एक ऐसा भी गाना बना जिसने इन सभी को पछाड़ते हुए म्यूजिक डायरेक्टर को अवॉर्ड दिलवा दिया। वो गाना था ‘अजीब दास्तां है ये कहां शुरू कहां खत्म’।
अजीब दास्तां है ये..इस गाने ने किया कमाल
1960 में राज कुमार और मीना कुमारी की एक फिल्म आई थी ‘दिल अपना पीर पराई’। इस फिल्म की कहानी एक ऐसे सर्जन की थी जिसे परिवार की मज़बूरी की वजह से किसी दूसरी लड़की से शादी करनी पड़ती है। लेकिन उसे प्यार हॉस्पिटल की एक नर्स से होता है। दोनों के बीच के दर्द, भावों को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। मीना कुमारी ने नर्स के किरदार को शानदार तरीके से निभाया। ये उनकी सबसे शानदार परफॉरमेंस में से एक मानी जाती है। इस फिल्म में उनपर एक गाना फिल्माया गया था जिसके बोल थे ‘अजीब दास्तां है ये कहां शुरू कहां खत्म’। इस गाने को शैलेंद्र ने लिखा था जो इससे पहले ‘मेरा जूता है जापानी’, ‘आवारा हूं’ जैसे गाने लिख चुके थे।
फिल्म का सबसे हिट गाना
मीना कुमारी और राज कुमार की फिल्म दिल अपना और प्रीत पराई में कुल 7 गाने थे। इन गानों में दोनों एक्टर्स के बीच के रिश्ते को खूबसूरती से दिखाया गया। लेकिन एक गाने ‘अजीब दास्तां है ये कहां शुरू कहां खत्म’ ने ऑडियंस के बीच एक अलग जगह बनाई थी। गाने को कंपोज किया था शंकर जयकिशन ने। ये जोड़ी पहले भी कई यादगारों गानों के लिए तारीफें बटोर चुकी थी। लेकिन इस बार एक अवॉर्ड की बारी थी। इस अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन में फिल्म मुगले-ए आजम का यादगार म्यूजिक बनाने वाले नौशाद, चौदहवीं का चांद के लिए म्यूजिक कंपोजर रवि लाइन में नॉमिनेटेड थे।
म्यूजिक डायरेक्टर ने जीता अवॉर्ड
इन दो दिग्गज म्यूजिक कंपोजर को हराकर एक गाने ‘अजीब दास्तां है ये’ के लिए शंकर जय किशन ने अवॉर्ड जीता था। वहीं गीतकार शकील को गाना ‘चौदहवीं का चांद’ लिखने के लिए बेस्ट गीतकार का अवॉर्ड दिया गया था। गाना ‘अजीब दास्तां है ये’ के अंतरा के बोल आज भी सोशल मीडिया रील में इस्तेमाल होते हैं. इस गाने के अंतरे की एक लाइन ‘मुबारकें तुम्हें कि तुम किसी के नूर हो गए, किसी के इतने पास हो कि सब से दूर हो गए’। ये गाना सदियों के लिए खास हो गया है।
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