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ईरान से पंगा ले फंस गए ट्रंप? अमेरिका का हथियार स्टॉक ही खत्म; मिसाइलों का भारी टोटा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका और ईरान के बीच लगभग पांच महीने से युद्ध जारी है। इस बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों ने इस दौरान अपनी लगभग सभी सबसे सटीक और महत्वपूर्ण लंबी दूरी की मिसाइलें खर्च कर दी हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच लगभग पांच महीने से जंग जारी है। दोनों देश एक-दूसरे पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहे हैं। इस दौरान बीच-बीच में सीजफायर भी हुए, लेकिन संघर्ष थमा नहीं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों ने इस पांच महीने लंबे संघर्ष में अपनी लगभग सभी सबसे सटीक और महत्वपूर्ण लंबी दूरी की मिसाइलें खर्च कर दी हैं। यूं कहें तो जिन हथियारों के दम पर अमेरिका कूद रहा था, अब वह खत्म हो गया है। बताया जा रहा है कि इस स्थिति ने पेंटागन के अंदर गंभीर चिंता पैदा कर दी है कि क्या अमेरिका किसी अन्य बड़े संघर्ष या वैश्विक संकट का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है?

एटीएसीएमएस और पीआरएसएम का भारी इस्तेमाल

रिपोर्ट में खासकर आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) और नई पीढ़ी की प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल (PRSM) का जिक्र किया गया है। ये दोनों जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें हैं, जिन्हें लंबी दूरी से उच्च सटीकता के साथ लक्ष्य भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। रॉयटर्स ने दो विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया कि युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने इनमें से लगभग सभी मिसाइलों का इस्तेमाल कर लिया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि एटीएसीएमएस और पीआरएसएम के स्टॉक में हुई कमी की विस्तृत जानकारी इससे पहले कभी सार्वजनिक नहीं की गई थी।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये मिसाइलें?

एटीएसीएमएस और पीआरएसएम को अमेरिकी सैन्य क्षमता का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ये मिसाइलें अमेरिकी बलों को सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने की सुविधा देती हैं। यूक्रेन-रूस युद्ध में भी इनकी भूमिका उल्लेखनीय रही है। अमेरिका द्वारा आपूर्ति किए गए एटीएसीएमएस का इस्तेमाल यूक्रेनी सेना ने रूसी क्षेत्र के अंदर स्थित लक्ष्यों पर हमला करने के लिए किया था। पीआरएसएम को एटीएसीएमएस का अगली पीढ़ी का विकल्प माना जाता है, जो अधिक दूरी और बेहतर तकनीकी क्षमता प्रदान करता है। रक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि चीन जैसे संभावित बड़े प्रतिद्वंद्वी के साथ किसी भी संभावित संघर्ष में ये हथियार निर्णायक साबित हो सकते हैं। हालांकि, रिपोर्ट में अमेरिकी भंडार में वर्तमान में बची हुई मिसाइलों की सटीक संख्या नहीं बताई गई है।

लंबे संघर्ष से टेंशन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में ईरान के साथ-साथ इजराइल से जुड़े संघर्ष को शुरू किया था। उस समय प्रशासन की उम्मीद थी कि यह अभियान सीमित और अल्पकालिक रहेगा। लेकिन पांच महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी लड़ाई जारी है। इस पृष्ठभूमि में अधिकारियों ने चिंता व्यक्त की है कि मिसाइलों के तेजी से घटते भंडार से रूस और चीन जैसे बड़े विरोधियों को रोकने या उनका मुकाबला करने की अमेरिकी क्षमता कमजोर पड़ सकती है। रॉयटर्स ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि युद्ध की शुरुआत में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के पास मौजूद जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलें लगभग समाप्त हो गई थीं। वर्तमान में वह दुनिया भर के अन्य सैन्य कमांड से उपलब्ध स्टॉक का उपयोग करके आपूर्ति को फिर से भरने का प्रयास कर रहा है।

वाइट हाउस और पेंटागन का रुख

रिपोर्ट के अनुसार, वाइट हाउस ने राष्ट्रपति ट्रंप का एक बयान साझा किया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास अभी भी दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक हथियार हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी रक्षा कंपनियां इस समय पहले से कहीं अधिक मात्रा में गोला-बारूद का उत्पादन कर रही हैं और अपने संयंत्रों तथा उपकरणों का विस्तार रिकॉर्ड स्तर पर कर रही हैं। दूसरी ओर, रक्षा विशेषज्ञों ने स्वीकार किया कि आर्टिलरी शेल और विभिन्न प्रकार की मिसाइलों सहित कई हथियारों का उत्पादन काफी बढ़ा है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि वर्तमान विनिर्माण स्तर लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की मांगों को पूरा करने के लिए अभी भी पर्याप्त नहीं हो सकता।

रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया गया कि न तो लॉकहीड मार्टिन (जो एटीएसीएमएस, पीआरएसएम और टीएचएएडी मिसाइल रक्षा प्रणाली बनाती है) और न ही रेथियॉन (जो टॉमहॉक क्रूज मिसाइल तथा पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर बनाती है) ने एजेंसी के सवालों का जवाब दिया। हालांकि, आरटीएक्स की एक इकाई रेथियॉन ने अमेरिकी हथियार भंडार को फिर से भरने के व्यापक प्रयासों के तहत टॉमहॉक मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए पेंटागन के साथ कई वर्षों का एक अस्थायी समझौता किया है।

पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने अमेरिकी सैन्य क्षमताओं का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिका की सेना दुनिया में सबसे शक्तिशाली है। राष्ट्रपति द्वारा चुने गए समय और स्थान पर अभियान चलाने के लिए उसके पास सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न कॉम्बैटेंट कमांड में कई सफल ऑपरेशन किए गए हैं और यह सुनिश्चित किया गया है कि अमेरिकी सेना के पास नागरिकों तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए क्षमताओं का व्यापक भंडार मौजूद हो।

क्या है अंदरखाने चर्चा?

रॉयटर्स के अनुसार, पिछले सप्ताह संघीय सरकार के अंदर मिसाइल स्टॉक में आई कमी का डेटा व्यापक रूप से प्रसारित हुआ। इससे ट्रंप प्रशासन के भीतर इस विषय पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान कब तक जारी रख सकता है, बिना भंडार को इतना कम किए कि अन्य वैश्विक संकटों पर प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रभावित हो जाए। एक सूत्र ने बताया कि एटीएसीएमएस और पीआरएसएम का भारी इस्तेमाल इस बात का संकेत देता है कि प्रशासन पायलट वाले विमानों से किए जाने वाले जोखिम भरे हवाई अभियानों की बजाय लंबी दूरी के सटीक स्ट्राइक विकल्प को प्राथमिकता दे रहा है।

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की मार्च में प्रकाशित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने बताया कि इन मिसाइलों का इस्तेमाल ईरान के अंदर स्थित लक्ष्यों पर हमला करने के लिए पहले ही किया जा चुका है। रिपोर्ट में कहा गया कि पीआरएसएम का स्टॉक सीमित था क्योंकि यह मिसाइल अपेक्षाकृत नई है। फिर भी अमेरिकी सेना ने 2027 के लिए बड़े पैमाने पर खरीद आदेश दिए हैं। आर्मी ने कथित तौर पर कहा है कि पीआरएसएम के पक्ष में एटीएसीएमएस का उत्पादन धीरे-धीरे कम किया जा रहा है।

पैट्रियट, टीएचएएडी और टॉमहॉक भंडार में भी गिरावट

सैन्य अधिकारियों ने हाल के हफ्तों में राष्ट्रपति ट्रंप को रक्षात्मक हथियारों, खासकर पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर के घटते भंडार के बारे में भी चेतावनी दी है। ये बैलिस्टिक मिसाइल खतरों का मुकाबला करने के लिए इस्तेमाल होते हैं। पिछले सप्ताह कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक और बड़ा हमला न करने का फैसला किया, क्योंकि सलाहकारों ने हथियार भंडार कम होने की चेतावनी दी थी। एक अमेरिकी अधिकारी ने इससे इनकार किया और कहा कि फैसला खाड़ी देशों के दबाव में लिया गया था।

सीएसआईएस की एक हालिया रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि फरवरी से जुलाई के बीच अमेरिका ने पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का लगभग 65 प्रतिशत इस्तेमाल कर लिया, जबकि टीएचएएडी इंटरसेप्टर के भंडार में लड़ाई की शुरुआत के स्तर से कम से कम 38 प्रतिशत की कमी आई। दो सूत्रों ने पुष्टि की कि सीएसआईएस के अनुमान सरकारी आंकड़ों से मोटे तौर पर मेल खाते हैं।

वहीं, एक सूत्र ने बताया कि अमेरिका ने युद्ध शुरू होने के बाद से दुनिया भर के टॉमहॉक क्रूज मिसाइल भंडार का आधे से थोड़ा कम इस्तेमाल कर लिया है। टॉमहॉक मिसाइलें, जो ज्यादातर नौसेना के डिस्ट्रॉयर, क्रूजर और सबमरीन से दागी जाती हैं, भारी सुरक्षा वाले लक्ष्यों पर अमेरिकी सेना के मुख्य लंबी दूरी के स्ट्राइक हथियारों में से एक हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN