Source :- LIVE HINDUSTAN
भारत में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इसका फायदा सिर्फ डिफेंस कंपनियों को ही नहीं, बल्कि उन कंपनियों को भी मिल सकता है, जो इन सेक्टर्स के लिए जरूरी मशीनरी और कंपोनेंट्स तैयार करती हैं। इसी कड़ी में सीएनसी मशीन बनाने वाली कंपनियां चर्चा में हैं। एयरक्राफ्ट, मिसाइल और दूसरे डिफेंस सिस्टम के पार्ट्स बनाने के लिए बेहद सटीक और एडवांस मशीनों की जरूरत होती है। सीएनसी यानी कंप्यूटर न्यूमेरिकल कंट्रोल मशीन का इस्तेमाल एल्युमिनियम, टाइटेनियम, स्टील और अलग-अलग एलॉय को सटीक साइज देने में किया जाता है।
IMTEX 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत मशीन-टूल कंजम्पशन के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है। सोर्स के अनुसार, देश का मशीन-टूल मार्केट करीब 1.8 अरब डॉलर से बढ़कर 2034 तक 3.5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹33,600 करोड़ तक पहुंच सकता है। डिफेंस और एयरोस्पेस में 5-एक्सिस और मल्टी-एक्सिस मशीनों की मांग बढ़ने से इस सेक्टर को सपोर्ट मिल सकता है।
1- ज्योति CNC ऑटोमेशन
इस सेक्टर में ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन एक प्रमुख नाम है। कंपनी का ऑर्डर बुक जून 2026 तक ₹4,848 करोड़ था, जिसमें एयरोस्पेस और डिफेंस की हिस्सेदारी करीब 38% थी। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी के रेवेन्यू में एयरोस्पेस और डिफेंस की हिस्सेदारी 37% रही। कंपनी की मौजूदा सालाना इंस्टॉल्ड कैपेसिटी करीब 6,000 सीएनसी मशीनों की है और इसे बढ़ाकर 16,000 मशीनों तक करने की योजना है। पहली तिमाही में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन करीब 86% रहा।
हालांकि, ज्योति सीएनसी के आंकड़ों में कुछ चुनौतियां भी नजर आती हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 24% बढ़कर ₹508.5 करोड़ हुआ, लेकिन नेट प्रॉफिट 20% घटकर ₹57.1 करोड़ रह गया। कंपनी ने ह्यूरॉन से जुड़े अकाउंटिंग बदलाव के कारण करीब ₹35 करोड़ का अनबिल्ड रेवेन्यू और ₹20-22 करोड़ का एबिटडा टाल दिया। इसके अलावा, फ्रांस में ह्यूरॉन को लेकर एक्सपोर्ट नियमों से जुड़ी जांच भी एक रिस्क फैक्टर है।
2- मैकपावर CNC मशीन्स
दूसरी कंपनी मैकपावर सीएनसी मशीन्स है। कंपनी के मुताबिक उसने 35 डिफेंस फैक्ट्रियों में 200 से ज्यादा मशीनें और 6 एविएशन व एयरोस्पेस फैसिलिटीज में 100 से ज्यादा मशीनें सप्लाई की हैं। जून 2026 तक इसका ऑर्डर बुक ₹456 करोड़ था, जिसमें नेक्सा मशीनों की हिस्सेदारी करीब 40% थी। कंपनी के पास ₹1,042.9 करोड़ के एक्टिव बिड्स थे, जिनमें डिफेंस और एयरोस्पेस से जुड़े बिड्स करीब ₹304 करोड़ के थे। मौजूदा कैपेसिटी 2,500 मशीन प्रति साल है, जिसे आगे 5,000 मशीनों तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
पहली तिमाही के आंकड़े भी मजबूत
मैकपावर के वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के आंकड़े भी मजबूत रहे। कंपनी का रेवेन्यू 56.1% बढ़कर ₹95.2 करोड़ और एबिटडा 94.8% बढ़कर ₹15.4 करोड़ हो गया। नेट प्रॉफिट 110.1% बढ़कर ₹9.6 करोड़ रहा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 में 30% से ज्यादा रेवेन्यू ग्रोथ का गाइडेंस दिया है। हालांकि, दोनों कंपनियों के लिए आगे की ग्रोथ ऑर्डर मिलने के साथ-साथ कैपेसिटी बढ़ाने, ऑर्डर समय पर पूरा करने और बड़े बिड्स को ऑर्डर में बदलने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
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