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₹9,500 की सैलरी से ₹80 लाख की कमाई, फिर इनकम हुई 0; इस शख्स की कहानी से सीखें ये 5 बातें

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Source :- LIVE HINDUSTAN

चेन्नई के 30 साल के मणिमारन कृष्णन की फाइनेंशियल जर्नी बड़ी दिलचस्प है, जो बताती है कि ज्यादा कमाई और ज्यादा दौलत एक ही चीज नहीं है। जी हां, क्योंकि उन्होंने करियर की शुरुआत सिर्फ ₹9,500 महीने की सैलरी से की थी। वहीं, कुछ साल बाद उनकी सालाना इनकम करीब ₹80 लाख तक पहुंच गई। लेकिन, जिस प्लेटफॉर्म से उन्हें यह कमाई हो रही थी, उसकी मोनेटाइजेशन पॉलिसी बदली और उनकी इनकम लगभग जीरो हो गई। इस बदलाव ने उन्हें कमाई, खर्च, सेविंग और इन्वेस्टमेंट को नए तरीके से देखने पर मजबूर किया। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।

इनकम बढ़ने पर खर्च भी बढ़ा

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब कमाई तेजी से बढ़ी तो मणिमारन ने खर्च भी बढ़ा दिया। ट्रिप, महंगा खाना, शॉपिंग, पार्टियों और ट्रेडिंग में उन्होंने करीब ₹4-5 लाख खर्च किए। उन्होंने करीब डेढ़ महीने के लिए फोर्ड मस्टंग GT (Ford Mustang GT) तक रेंट पर ली थी और एक महीने में करीब ₹23,000 का फ्यूल खर्च किया, यानी बड़ी इनकम ने उन्हें ज्यादा खर्च करने की क्षमता तो दी, लेकिन यह पैसा लंबे समय की वेल्थ में कितना बदल रहा है, इस पर उतना ध्यान नहीं गया।

इनकम का रिस्क

उनकी कहानी का दूसरा बड़ा पहलू इनकम का रिस्क है। एक समय फेसबुक से उन्हें काफी ज्यादा कमाई हो रही थी। इसी दौरान उनके बैंक अकाउंट में करीब ₹39 लाख जमा हुए और उन्होंने चेन्नई में एक फ्लैट खरीद लिया, वह भी बिना होम लोन के। लेकिन, कुछ महीनों बाद फेसबुक की मोनेटाइजेशन पॉलिसी में बदलाव के चलते उनकी कमाई लगभग खत्म हो गई। इससे एक बात साफ हुई कि अगर कमाई का बड़ा हिस्सा किसी एक प्लेटफॉर्म या एक ही सोर्स पर निर्भर है, तो इनकम डायवर्सिफिकेशन और असेट्स बनाना जरूरी हो जाता है।

मणिमारन ने अपने फाइनेंशियल गोल्स को भी बदला है। पहले उनका लक्ष्य बैंक अकाउंट में ₹80 लाख देखना था और वह इसे हासिल कर चुके थे। अब उनका फोकस करीब ₹5 करोड़ का रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार करने पर है। 2024 में उन्होंने म्युच्युअल फंड SIP शुरू की थी, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 2025 में ₹50,000 प्रति महीने कर दिया। डायरेक्ट स्टॉक्स में भी निवेश किया, हालांकि, कुछ शुरुआती फैसलों में उन्हें नुकसान हुआ। अब उनका कहना है कि किसी शेयर में पैसा लगाने से पहले वे बिजनेस, फाइनेंशियल परफॉर्मेंस, वैल्युएशन और फ्युचर ग्रोथ को समझने की कोशिश करते हैं।

इक्विटी निवेश में भी उनका अनुभव आसान नहीं रहा। एक समय उनका पोर्टफोलियो करीब 18-20% तक गिर गया था। इसके बावजूद उन्होंने ₹50,000 की SIP बंद नहीं की और घबराकर पूरा पोर्टफोलियो बेचने का फैसला नहीं किया। उनकी मौजूदा इनकम भी फिक्स नहीं है। कुछ महीनों में फ्रीलांस इनकम करीब ₹50,000 रहती है, जबकि बेहतर महीनों में यह ₹1.5 लाख तक पहुंच सकती है। इसके बावजूद सेविंग और इन्वेस्टमेंट उनकी प्राथमिकता बनी हुई है। उनके पास डायरेक्ट स्टॉक्स, फिजिकल गोल्ड और RD भी हैं।

इस पूरी कहानी का सबसे अहम सबक यह है कि इनकम बढ़ना वेल्थ बनने की गारंटी नहीं है। बड़ी कमाई का एक हिस्सा अगर लगातार खर्च हो जाए तो इनकम रुकते ही फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ सकता है। वहीं सेविंग, इंवेस्टमेंट और असेट्स पर फोकस करने से कमाई को लंबे समय की फाइनेंशियल सिक्योरिटी में बदला जा सकता है। मणिमारन की प्राथमिकता अब सिर्फ ज्यादा कमाना नहीं, बल्कि ऐसा कॉर्पस तैयार करना है, जो भविष्य में इनकम बदलने पर भी उनके काम आए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN